अधिक मास को सनातन परंपरा में बहुत पवित्र और प्रभावशाली समय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस पूरे महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से दीपदान का इस मास में बहुत महत्व बताया गया है, क्योंकि यह भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
⭐ कब आता है अधिक मास?
अधिक मास हिंदू कैलेंडर में हर 32-33 महीने में आने वाला एक अतिरिक्त महीना है, जो चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाता है। इसे 'मलमास' और पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं तथा यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। दरअसल चंद्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365 दिन) के बीच के 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इस कारण यह हर साल नहीं आता, बल्कि लगभग 32-33 महीनों के बाद आता है। दूसरे शब्दों में जब किसी महीने में सूर्य की कोई नई संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, तब वह महीना अधिक मास कहलाता है। 2026 में यह 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ माह में रहेगा। इस दौरान पूजा, दान और व्रत जैसे आध्यात्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य मिलता है।
🌊 यमुना घाट पर 7 दिनों का निरंतर अनुष्ठान
इस पावन महीने की शुरुआत में वृंदावन के विश्राम घाट पर एक विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है जो कि 7 दिनों तक चलेगा। इस अनुष्ठान में 21,000 लक्ष्मी नारायण मंत्रों का जाप और 2100 दीपदान किया जाएगा। हर दिन यमुना जी के तट (विश्राम घाट) पर 300 दीपदान और 3000 लक्ष्मी नारायण मंत्रों का जाप होगा। इस तरह 7 दिनों में यह अनुष्ठान पूर्ण रूप से संपन्न होगा। जब किसी पूजा को नियमित रूप से कई दिनों तक किया जाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव जीवन में गहराई से महसूस होता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो जीवन में आर्थिक स्थिरता, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं।
🪔 अधिक मास और दीपदान का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि अधिक मास में किया गया दीपदान “कोटि पुण्य फल” देने वाला होता है, यानी इसका फल करोड़ गुना बढ़ जाता है। जब श्रद्धा के साथ यमुना जी के तट पर दीप जलाए जाते हैं, तो यह केवल एक पूजा नहीं बल्कि भगवान के प्रति प्रेम और आस्था का प्रतीक बन जाता है।
🌸 यमुना जी और लक्ष्मी नारायण की कृपा
मां यमुना को राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का स्वरूप माना जाता है। इसलिए अधिक मास के दौरान यमुना जी में दीपदान करने से भगवान लक्ष्मी नारायण और राधा-कृष्ण दोनों की कृपा प्राप्त होती है। लक्ष्मी जी धन और समृद्धि की देवी हैं, वहीं भगवान नारायण जीवन में संतुलन और सुख प्रदान करते हैं।
🙏 अगर आप भी अपने जीवन में सुख-शांति और आर्थिक संतुलन पाना चाहते हैं तो श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र अनुष्ठान में अवश्य भाग लें। भगवान विष्णु की कृपा से आपको अपनी इच्छाएं पूरी करने का सही मार्ग जरूर प्राप्त होगा।