🚩 सावन पुत्रदा एकादशी पर शिव–गणेश की संयुक्त कृपा से पाएं आर्थिक स्थिरता और कर्ज़ से राहत का दिव्य आशीर्वाद✨
🛕गणेश डोडीताल मंदिर और श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी दुर्लभ पूजा के अवसर के भागी बनें।
सावन का महीना भक्तों के लिए आस्था, तपस्या और आराधना का विशेष काल माना जाता है। यह समय केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि जीवन में आई कठिनाइयों से बाहर निकलने की एक आध्यात्मिक प्रक्रिया का भी प्रतीक होता है। इसी सावन माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी की तिथि, भगवान शिव और भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने का एक दुर्लभ अवसर लेकर आई है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों को कर्ज़, मानसिक उलझनों और जीवन की आर्थिक बाधाओं से उबारने वाले देव हैं, वहीं उनके पुत्र भगवान गणेश जीवन में सफलता की राह में आने वाले विघ्नों को दूर करते हैं।
पुराणों में उल्लेख मिलता है कि यदि कोई भक्त संपूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव और भगवान गणेश दोनों की संयुक्त आराधना करे, तो उसे जीवन की जटिलताओं से निकलने का मार्ग प्राप्त हो सकता है विशेषकर तब, जब यह पूजा एक पवित्र तिथि और विशेष स्थलों पर की जाए। इसी संयुक्त आह्वान के भाव से प्रेरित होकर, इस बार श्री मंदिर के माध्यम से 1008 दूर्वा अर्चना एवं शिव रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान दो पवित्र स्थलों से जुड़ा है।
🛕 पहला है गणेश डोडीताल मंदिर, उत्तरकाशी में स्थित एक शांत और आध्यात्मिक स्थल, जिसे भगवान गणेश के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। यहां 1008 दूर्वाओं से भगवान गणेश की विशेष अर्चना की जाएगी। शास्त्रों में कहा गया है कि दूर्वा अर्पण से विघ्न, दुर्भाग्य और ऋण बाधाएं शांत हो सकती हैं।
🛕 दूसरा स्थल है श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जहां सावन के इस विशेष दिन भगवान शिव का पंचामृत, गंगाजल और बेलपत्र से रुद्राभिषेक किया जाएगा। यह अभिषेक विशेष रूप से मानसिक स्पष्टता, जीवन में स्थिरता और शांति के लिए किया जाता है।
🙏 यदि आप भी जीवन में आर्थिक उलझनों, ऋण से घिरे अनुभवों या कार्यों में बार-बार आ रही रुकावटों से राहत चाहते हैं, तो इस पावन एकादशी पर शिव–गणेश की संयुक्त पूजा में सहभागी बनें और श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अवसर का लाभ उठाएं।