🛕 सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। यह दिन साहस, अनुशासन और बाधाओं को दूर करने की शक्ति का प्रतीक है। जब यह दिन पंचमुखी हनुमान जी को समर्पित होता है, तब उनकी कृपा को और भी प्रभावशाली माना जाता है। पंचमुखी स्वरूप के पाँच मुख पाँचों दिशाओं से रक्षा का प्रतीक हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा जीवन के चारों ओर एक मजबूत आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनाती है, जो भय को साहस में बदलने और कठिन समय में आत्मविश्वास बनाए रखने में सहायक होती है।
21 किलो सिंदूर चोला अर्पण और चमेली तेल अभिषेक भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का एक अत्यंत श्रद्धेय अनुष्ठान है। माना जाता है कि हनुमान जी को चमेली की सुगंध विशेष प्रिय है। चमेली तेल के साथ सिंदूर चोला चढ़ाना उनकी भक्ति की एक प्राचीन परंपरा है। जहाँ तिल का तेल शनि से जुड़े प्रभावों के लिए और सरसों का तेल बुरी नजर से रक्षा के लिए उपयोग किया जाता है, वहीं चमेली का तेल हनुमान जी की प्रिय अर्पण सामग्री माना जाता है। यह अनुष्ठान समर्पण, भक्ति और शक्ति का प्रतीक है और हनुमान जी की कृपा से राहु और शनि जैसे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने वाला माना जाता है।
इस पंचमुखी हनुमान सिंदूर चोला विशेष पूजा के माध्यम से भक्त निर्भय साहस, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और हर दिशा से आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति की प्रार्थना करते हैं। श्री मंदिर के माध्यम से इस अनुष्ठान में भाग लेकर श्रद्धालु पंचमुखी हनुमान जी की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं और जीवन में आत्मविश्वास, स्थिरता और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।