🌑 कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित सबसे शक्तिशाली तिथियों में से एक मानी जाती है। भगवान काल भैरव धर्म के रक्षक और समय के अधिपति हैं। इस पावन दिन की ऊर्जा आत्मसंयम, ध्यान और गहन शुद्धि में विशेष रूप से सहायक होती है। मन स्वाभाविक रूप से शांत होने लगता है, जिससे छिपे हुए भय, तनाव और भ्रम बाहर आकर समाप्त होते हैं और उनके स्थान पर साहस, स्पष्टता और आंतरिक शक्ति का विकास होता है।
🌘 वर्ष 2026 की पहली कालाष्टमी विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है, क्योंकि यह नए वर्ष की शुरुआत भगवान काल भैरव की कृपा में होती है। यह अवसर पुराने कर्मों, भावनात्मक बोझ और अधूरी ऊर्जाओं को छोड़ने का दुर्लभ अवसर देता है। यह पवित्र तिथि मन की चिंताओं को समर्पित कर, समय की धारा के साथ स्वयं को संतुलित करने और नए वर्ष के लिए निर्भय आधार स्थापित करने में सहायक होती है। कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा से भय, अस्थिरता, निर्णयहीनता और नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं। उनकी कृपा से साहस बढ़ता है, सोच स्पष्ट होती है और सही दिशा प्राप्त होती है।
🔥 21 ब्राह्मणों द्वारा 1,08,000 भैरव मूल मंत्र जाप, तंत्रयुक्त महायज्ञ और कालभैरवाष्टकम् पाठ 2026 की पहली कालाष्टमी पर साधक की आंतरिक ऊर्जा को स्थिर करने और गहरे मानसिक व कर्मिक अवरोधों को शांत करने के लिए किए जाते हैं। मंत्र जाप भय और कमजोरी को कम करता है, महायज्ञ सूक्ष्म ऊर्जाओं को शुद्ध करता है और कालभैरवाष्टकम् भगवान भैरव की रक्षा शक्ति को जाग्रत करता है।
🕉️ यह कालाष्टमी महायज्ञ श्री मंदिर द्वारा भारत के दो प्रमुख भैरव धामों — श्री विक्रांत भैरव मंदिर, उज्जैन और श्री बटुक भैरव मंदिर, काशी में संपन्न किया जा रहा है। इस अनुष्ठान में शामिल 1,08,000 भैरव मूल मंत्र जाप श्री विक्रांत भैरव मंदिर में होंगे, वहीं, महाआरती श्री बटुक भैरव मंदिर, काशी में संपन्न होगी। साल 2026 की पहली कालाष्टमी पर इसमें सहभागी बन आप नए वर्ष में सुरक्षा, मानसिक संतुलन और निर्भय प्रगति की शुभ शुरुआत कर सकते हैं।