18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दशांश हवन एक विशेष राहु दोष शांति अनुष्ठान है, जो उत्तराखंड के पवित्र राहु पैठाणी मंदिर में संपन्न किया जाता है। यह पूजा उन भक्तों के लिए की जाती है जो जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों, मन की बेचैनी, डर, भ्रम और अचानक बनने वाली परेशानियों से राहत पाना चाहते हैं। राहु के असंतुलित प्रभाव से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है और निर्णय लेने में कठिनाई महसूस होती है। इस अनुष्ठान का भाव मन को स्थिर करना, सोच को स्पष्ट बनाना और जीवन में संतुलन स्थापित करना है।
ज्योतिष शास्त्र में राहु को अचानक परिवर्तन और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना गया है। जब राहु कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है या अन्य ग्रहों के साथ प्रतिकूल संबंध बनाता है, तब मानसिक तनाव, डर, भ्रम, सामाजिक असहजता और बार-बार बाधाएँ आने लगती हैं। ऐसे समय में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दशांश हवन को राहु की अशांत ऊर्जा को शांत करने का प्रभावशाली उपाय माना जाता है। यह साधना मन की दिशा को स्थिर करने और आत्मबल बढ़ाने की भावना से की जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय असुर स्वरभानु ने छल से अमृत पी कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर अलग कर दिया। जिस स्थान पर वह सिर गिरा, वही स्थान आज राहु पैठाणी के रूप में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह मंदिर राहु उपासना के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। यहाँ राहु देव की पूजा भगवान शिव के साथ की जाती है, जिससे यह स्थान राहु से जुड़े दोषों की शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मान्यता है कि राहु के नक्षत्र में यहाँ किया गया मंत्र जाप और हवन साधना को शीघ्र फलदायी बनाता है। इस दिन की गई प्रार्थना मन की उलझनों को शांत कर जीवन को सही दिशा देने में सहायक मानी जाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य अनुष्ठान में भाग लेकर भक्त राहु के प्रभाव को समझने, अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करने और जीवन में शांति, संतुलन और स्थिरता का अनुभव करने की प्रार्थना करते हैं।