मानसिक स्थिरता, जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों और अचानक होने वाली परेशानियों से राहत पाने के लिए राहु पैठाणी मंदिर में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दशांश हवन का यह विशेष अनुष्ठान किया जा रहा है। यह पूजा विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो राहु के असंतुलित प्रभाव के कारण बेचैनी, डर, भ्रम, आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में राहु को अचानक परिवर्तन देने वाला ग्रह माना जाता है। जब राहु अशुभ स्थिति में होता है या अन्य ग्रहों के साथ कठिन योग बनाता है, तब यह मानसिक तनाव, असमंजस, सामाजिक असहजता, अनावश्यक डर और बार-बार आने वाली बाधाओं का कारण बन सकता है। ऐसे समय में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दशांश हवन को राहु की अशांत ऊर्जा को शांत करने और जीवन में संतुलन लाने का पारंपरिक उपाय माना गया है।
समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार, असुर स्वरभानु ने छल से अमृत पी लिया था। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। जिस स्थान पर उसका सिर गिरा, वही स्थान आगे चलकर राहु पैठाणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यही सिर राहु ग्रह कहलाया। इस मंदिर में राहु देव की पूजा भगवान शिव के साथ एक अनोखे रूप में की जाती है, इसलिए यह भारत के उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जहाँ राहु देव की विधि-पूर्वक पूजा की जाती है। माना जाता है कि राहु देव के अपने नक्षत्र में यहाँ किया गया अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है।
इस पावन अनुष्ठान में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लेकर भक्त राहु के प्रभाव को समझने, अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करने और जीवन में शांति, संतुलन और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हैं।