🌟 तरक्की लगभग रुक सी गई है? कहीं आपकी समृद्धि के रास्ते में बृहस्पति-राहु युति दोष तो आकर नहीं बैठ गया?
🕉️ जानिए, क्यों बृहस्पति-राहु युति दोष को माना जाता है सबसे घातक ज्योतिषीय दोषों में से एक? 🔮✨
ज्योतिष के अनुसार, सभी नौ ग्रहों का विशेष महत्व है। ये ग्रह अपनी-अपनी अवधि के आधार पर शुभ और अशुभ दोनों तरह के परिणाम प्रदान करते हैं। कभी-कभी, दो ग्रह एक ही भाव में होते हैं, जिससे युति बनती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में विपरीत प्रवृत्ति वाले ग्रहों की युति हो, तो यह युति व्यक्ति के लिए विनाशकारी हो सकती है। ज्योतिषियों का मानना है कि राहु और बृहस्पति की प्रवृत्ति विपरीत होती है और उनके संयोग से गुरु चांडाल योग बनता है। माना जाता है कि यह प्रतिकूल योग कुंडली में मौजूद सकारात्मक योगों को खत्म कर देता है, जिससे जीवन में कई तरह की समस्याएं आती हैं। शास्त्रों में राहु को एक शक्तिशाली ग्रह माना गया है जो व्यक्ति के जीवन को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। आमतौर पर ये नकारात्मक परिणामों से जुड़ा होता है, क्योंकि यह धन, समृद्धि और भौतिक कल्याण में बाधा उत्पन्न करता है।
शास्त्रों के अनुसार, राहु और बृहस्पति की युति से होने वाले बुरे असर को कम करने के लिए राहु के मूल मंत्र का 18,000 बार और बृहस्पति के मूल मंत्र का 16,000 बार जाप करना चाहिए। इसके बाद एक हवन करना बहुत ही शुभ और लाभकारी माना जाता है। इसलिए, काशी के बृहस्पति मंदिर में बृहस्पति-राहु युति दोष निवारण पूजा का आयोजन किया जा रहा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, बृहस्पति देव ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें देवगुरु बृहस्पति की उपाधि दी और उन्हें नवग्रहों में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया। तब से, देवगुरु बृहस्पति इस मंदिर में पूजनीय हैं, जहाँ उनकी पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। चूंकि राहु को भगवान शिव का एक महान भक्त भी माना जाता है, इसलिए इस मंदिर में पूजा करने से इस अशुभ योग से राहत मिलती है। श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान में भाग लें और समृद्धि और भौतिक कल्याण के लिए दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।