महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और ऊर्जा से भरपूर समय मानी जाती है। यह रात्रि केवल साधना और पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि आत्मा को जागृत करने, मन को शुद्ध करने और जीवन में नई दिशा पाने का भी विशेष समय माना जाता है। कहा जाता है कि इस पावन रात्रि में शिव तत्व पूरी तरह सक्रिय होता है और साधक के जप, भक्ति और रुद्राभिषेक से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
इसी अवसर पर श्री मंदिर द्वारा आयोजित किया जा रहा है 1.25 लाख “ॐ नमः शिवाय नमस्तुभ्यम्” महा जाप एवं रुद्राभिषेक, जो साधक को अद्भुत आध्यात्मिक जुड़ाव का अनुभव देने वाला माना जाता है। शिव महापुराण में उल्लेख है कि एक “नमस्तुभ्यम्” मंत्र जाप लगभग 1000 महामृत्युञ्जय मंत्रों के बराबर होता है। इसलिए इस महा जाप के माध्यम से साधक 12.5 करोड़ महामृत्युञ्जय मंत्रों के समान स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अनुभव कर सकते हैं।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, पंचामृत, भस्म और बिल्वपत्र से अभिषेक किया जाता है और मंत्रों का उच्चारण साधक के भीतर नकारात्मकता को कम करने, मानसिक संतुलन बनाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में सहायक माना जाता है। यह अनुष्ठान केवल स्वास्थ्य और मानसिक स्थिरता के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता, नई दिशा और आध्यात्मिक ऊर्जा जोड़ने का अवसर भी दे सकता है।
यह विशेष रुद्राभिषेक श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में संपन्न होगा, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित यह दिव्य धाम “ॐ” के स्वरूप से जुड़ा माना जाता है। परंपराओं में वर्णन मिलता है कि यहाँ भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर भक्तों को संरक्षण और संतुलन का आशीर्वाद दिया। ऐसा माना जाता है कि इस पावन स्थान पर किया गया रुद्राभिषेक मन को शांति देने, विचारों में स्पष्टता लाने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की भावना को जागृत करने में सहायक होता है।
भक्त महाशिवरात्रि के इस दिव्य अवसर पर श्री मंदिर के माध्यम से ऑनलाइन जुड़कर इस विशेष रुद्राभिषेक में सहभागिता कर सकते हैं और भगवान शिव की कृपा, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्मरण कर अपने जीवन में संतुलन और प्रेरणा का स्वागत कर सकते हैं। 🙏