हिंदू धर्म में मंत्र जप को ईश्वर से जुड़ने का एक सबसे शक्तिशाली तरीका माना गया है। शुभ दिनों, जैसे दुर्गा अष्टमी, पर पवित्र मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक ऊर्जा का निर्माण होता है, जो मन को शुद्ध करता है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाता है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है। नवार्ण मंत्र मां दुर्गा और उनकी नौ स्वरूपों को समर्पित सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण मंत्रों में से एक है। यह मंत्र मां दुर्गा की शक्ति, ज्ञान और करुणा का प्रतीक है, जो भक्तों को बाधाओं को पार करने, इच्छाओं की पूर्ति करने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में सहायता करता है। इसी कारण भक्त दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों को प्रसन्न करने के लिए नवार्ण मंत्र का जाप करते हैं। "नवार्ण" शब्द "नव" और "अर्ण" के संयोजन से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ "नौ अक्षर" होता है।
शास्त्रों में "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" मंत्र को नवार्ण मंत्र के रूप में वर्णित किया गया है। इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की शक्तियों से सीधे जुड़ा हुआ है।
पहला अक्षर "ऐं" मां शैलपुत्री से संबंधित है।
दूसरा अक्षर "ह्रीं" मां ब्रह्मचारिणी द्वारा शासित है।
तीसरा अक्षर "क्लीं" मां चंद्रघंटा से जुड़ा है।
चौथा अक्षर "च" मां कूष्मांडा का प्रतीक है।
पांचवां अक्षर "मुन" मां स्कंदमाता को प्रभावित करता है।
छठा अक्षर "द" मां कात्यायनी से संबंधित है।
सातवां अक्षर "यै" मां कालरात्रि का द्योतक है।
आठवां अक्षर "वि" मां महागौरी का प्रतिनिधित्व करता है।
नौवां अक्षर "छे" मां सिद्धिदात्री से जुड़ा हुआ है।
पूजन विवरण
ब्राह्मणों की संख्या: 12
पूजन की अवधि: 2
जप की संख्या: 1,25,000
ऐसा माना जाता है कि दुर्गा अष्टमी के दिन नवार्ण मंत्र का जाप करने से मां दुर्गा की दिव्य कृपा प्राप्त होती है, जो किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने में सहायक होती है। यदि इस मंत्र के जाप को दुर्गा सप्तशती और नवचंडी महायज्ञ के साथ किया जाए, तो इसका प्रभाव अत्यंत फलदायी और शुभकारी हो जाता है।
यह कहा गया है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से एक दिव्य ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है और मां दुर्गा की कृपा से इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद देती है। इसी उद्देश्य से काशी के श्री दुर्गा कुंड मंदिर में 1,25,000 नवार्ण मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ और नवचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन पूजन में भाग लें और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति एवं सफलता प्राप्ति का आशीर्वाद पाएं।