सनातन धर्म में भगवान हनुमान को भगवान शिव के रुद्रांश, अर्थात् शिव के दिव्य अंश के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार, हनुमान जी की माता अंजनी एक दिव्य अप्सरा थीं, जिन्हें एक श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए अंजनी जी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वह स्वयं उनके पुत्र के रूप में अवतरित होंगे। जब अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि हवन किया, तब उस यज्ञ के प्रसाद का एक अंश पवन देव के माध्यम से अंजनी को प्राप्त हुआ, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ। इस प्रकार, हनुमान जी को भगवान शिव और पवन देव दोनों का अंश माना जाता है।
पूरे भारत में कार्तिक माह को अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के ये अंतिम महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इसी कारण, इस विशेष माह में भगवान शिव और उनके रुद्रांश हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व है। यही कारण है कि इस मास में 11,000 हनुमान मूल मंत्र का जाप करना अत्यधिक शुभफलदायी माना गया है। इसके साथ ही, संकटों और विपत्तियों को दूर करने के लिए बुद्धि और शक्ति प्राप्त करने हेतु सुंदरकांड पाठ भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस के सुंदरकांड में भगवान हनुमान की निडरता और साहस का वर्णन है। भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का सबसे सशक्त माध्यम सुंडरकांड को माना गया है। इसके माध्यम से भक्तों को न केवल भगवान हनुमान का, बल्कि भगवान श्री राम और माँ सीता का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए कार्तिक मास के मंगलवार के दिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में 11,000 हनुमान मूल मंत्र जाप और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जा रहा है। यह ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां भगवान शिव स्वयंभू रूप में विराजते हैं। इस पूजा में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लें और हनुमान जी का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।