हिंदु धर्म में अमावस्या तिथि का बेहद महत्व है। हालांकि यह अंधकार और नकारात्मकता का दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन नकारात्मक शक्तियां प्रबल पर होती हैं। वहीं सूर्यदेव परम ऊर्जा एवं प्रकाश का स्रोत हैं, जिनकी अराधना से व्यक्ति के जीवन से अंधकार को दूर होता है और सकारात्मकता लाने का श्रेष्ठ उपाय है। इसलिए अमावस्या के दिन सूर्य देव की उपासना अत्यंत शुभ मानी जाती है। कलयुग में सूर्य देव एकलौते ऐसे देव है जो प्रत्यक्ष रूप में हैं। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, सम्पूर्ण जगत जब अंधकार में डूबा था, तब ब्रह्मा जी के मुख से निकले प्रथम शब्द ‘ॐ’ के तेज से ही सूर्य की उत्पत्ति हुई थी। वेदों में सूर्य देव को साहस, प्रसिद्धि, राजनीति, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। कहा जाता है कि देव सूर्य की उपासना से व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि भक्त सूर्य देव को प्रसन्न करने और उनका आशीष प्राप्त करने के लिए कई तरह के अनुष्ठान करते हैं, जिनमें से सूर्य गायत्री मंत्र का जाप एवं आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ भी एक है।
सूर्य गायत्री मंत्र, सूर्य देव को समर्पित एक शक्तिशाली मंत्र है। कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप के माध्यम से सूर्य देव जैसा तेज उत्पन्न होता है। वहीं आदित्य स्तोत्र पाठ का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है, जहां ऋषि अगस्त्य ने भगवान राम को रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए इसका वर्णन किया था। कहा जाता है कि यह श्रृद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ किया जाए तो व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है, वहीं इस दिन अमावस्या भी पड रहा है ऐसे में इस शुभ अवसर पर किया गया यह अनुष्ठान कई गुना अधिक फलदायी हो सकता है। इसलिए अमावस्या पर श्री गलता जी सूर्य मंदिर में 51,000 सूर्य गायत्री मंत्र जाप और आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ का आयोजन किया जा रहा है। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और सूर्य देव द्वारा राजनीति एवं सरकारी नौकरियों में सफलता का आशीष प्राप्त करें।