फाल्गुन शुक्ल एकादशी सनातन परंपरा में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। यह दिन नई आशा, संरक्षण और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा होता है। विशेष रूप से संतान सुख के लिए की गई पूजा इस दिन बहुत फलदायी मानी जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी पर भगवान विष्णु और उनके बाल स्वरूप श्री लड्डू गोपाल की आराधना करने से घर-परिवार में सुख, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
एकादशी संतान सुख समृद्धि विशेष के अंतर्गत 11,000 संतान गोपाल मंत्र जाप, श्री लड्डू गोपाल पंचामृत अभिषेक और संतान सुख प्राप्ति हवन का आयोजन किया जा रहा है। संतान गोपाल भगवान श्री कृष्ण का बाल स्वरूप है, जिनकी पूजा संतान प्राप्ति, बच्चों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना से की जाती है। जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं या अपने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुख के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं, उनके लिए यह पूजा आस्था और विश्वास का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।
संतान गोपाल मंत्र का जाप माता-पिता के मन में आशा और धैर्य को मजबूत करने से जुड़ा है। पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से श्री लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाता है, जो पवित्रता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद संतान सुख प्राप्ति हवन किया जाता है, जिसमें वैदिक मंत्रों के साथ आहुति दी जाती है। भक्त मानते हैं कि यह पूरा अनुष्ठान परिवार में सुखद वातावरण बनाने और बच्चों के जीवन में सकारात्मक दिशा लाने की भावना से किया जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पूजा?
परिवार में संतान का सुख केवल जन्म तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की निरंतर कामना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। एकादशी के दिन किया गया यह अनुष्ठान माता-पिता के प्रेम, समर्पण और प्रार्थना का प्रतीक है। यह पूजा मन को शांति देती है और परिवार के बीच विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने में सहायक मानी जाती है।
🪔 यह विशेष पूजा एकादशी के पावन दिन मथुरा, भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि में अत्यंत श्रद्धा के साथ संपन्न की जाएगी। इस अनुष्ठान में कई प्रभावशाली पारंपरिक विधियां सम्मिलित होंगी:
🔸 11,000 संतान गोपाल मंत्र जाप — संतान प्राप्ति की कामना, बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और परिवार में सुख-समृद्धि के भाव से किया जाने वाला दिव्य मंत्र जाप।
🔸 श्री लड्डू गोपाल पंचामृत अभिषेक — भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से श्रद्धापूर्वक अभिषेक, जो प्रेम, पवित्रता और संतान पर भगवान की कृपा का प्रतीक माना जाता है।
🔸 संतान सुख प्राप्ति हवन — वैदिक मंत्रों के साथ किया जाने वाला पवित्र अग्नि अनुष्ठान, जो संतान के संरक्षण, पारिवारिक सुख, सकारात्मक वातावरण और जीवन में शुभता की भावना से समर्पित होता है।
ये सभी पूजा विधियां उन भक्तों के लिए की जाती हैं, जो संतान सुख, संतान के स्वास्थ्य और परिवार में शांति की कामना रखते हैं।
इस पावन अवसर पर किया जाने वाला यह अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति से संपन्न होता है। श्री मंदिर के माध्यम से भक्त घर बैठे इस विशेष पूजा में भाग लेकर भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की कृपा का आह्वान कर सकते हैं। यह पूजा उन परिवारों के लिए खास मानी जाती है जो संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं या अपने बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और सफल जीवन के लिए आशीर्वाद चाहते हैं। श्रद्धा से की गई यह आराधना परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की भावना को मजबूत करती है।