होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सत्य की अधर्म पर विजय का दिव्य प्रतीक है। यह वही पावन रात्रि है जब भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा कर यह संदेश दिया कि जो भक्त सच्चे भाव से शरण में आता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। अग्नि में होलिका का दहन केवल एक घटना नहीं, बल्कि जीवन की हर नकारात्मकता, भय और बाधा के समाप्त होने का संकेत माना जाता है।
इसी पवित्र भाव को जागृत करने के लिए इस विशेष अनुष्ठान में 11,000 नरसिंह मंत्रों का जाप और होलिका दहन यज्ञ किया जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य रात्रि में की गई साधना के माध्यम से बाहरी ही नहीं, बल्कि भीतर की नकारात्मकता- जैसे डर, असुरक्षा, भ्रम और पुराने कर्मों से बने अवरोध भी अग्नि में समर्पित हो जाते हैं। यह साधना केवल बाधाओं को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में साहस, सुरक्षा और आत्मविश्वास जगाने का माध्यम मानी जाती है।
भगवान नरसिंह को अपने भक्तों का रक्षक माना गया है। जिस प्रकार उन्होंने प्रह्लाद को हर परिस्थिति में सुरक्षित रखा, उसी प्रकार इस पावन रात्रि में उनकी उपासना करने से पूरे वर्ष दिव्य रक्षा का भाव प्राप्त होता है। होलिका दहन की अग्नि में दी जाने वाली आहुति जीवन के दुःख, नकारात्मक सोच और शत्रु बाधा को समर्पित करने का प्रतीक होती है, जिससे नई शुरुआत का मार्ग बनता है।
आज के समय में कई बार बिना कारण कार्यों में रुकावट आती है, मन में भय बना रहता है या छिपे विरोधियों का प्रभाव महसूस होता है। यह विशेष नरसिंह साधना उस नकारात्मक ऊर्जा को जलाकर जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा का भाव जगाने के लिए की जाती है। यह हमें याद दिलाती है — इस होली अपने दुःखों को अग्नि में समर्पित करें और नरसिंह भगवान की दिव्य रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन होलिका दहन महापूजा में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप भी भगवान नरसिंह की शरण में जाकर इस होली से अगली होली तक दिव्य सुरक्षा, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह साधना जीवन में भय से मुक्ति, शत्रु बाधा से रक्षा और आत्मबल जागृत करने का पावन माध्यम मानी जाती है।