सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह शुक्र ग्रह से जुड़ा है। शुक्र देव को धन, वैभव, सुख और समृद्धि का कारक माना गया है। मान्यता है कि इस दिन की गई लक्ष्मी साधना जीवन में आर्थिक उन्नति और सौभाग्य का मार्ग बनाती है। लेकिन केवल धन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसकी रक्षा और स्थिरता भी उतनी ही आवश्यक होती है। इसी कारण देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर और रक्षक स्वरूप भगवान बटुक भैरव की संयुक्त उपासना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। जब इनके साथ श्री सूक्त हवन के माध्यम से माँ लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है, तब यह साधना धन, स्थिरता और सुरक्षा- तीनों का आशीर्वाद देने वाली मानी जाती है।
भगवान कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था। तब शिवजी ने उन्हें समस्त लोकों की धन-संपत्ति का रक्षक बनाया। दूसरी ओर बटुक भैरव भगवान शिव के ही रक्षक स्वरूप हैं, जो भय, बाधाओं और नकारात्मकता को दूर करते हैं। इसलिए इन दोनों की संयुक्त उपासना जीवन में उन्नति के साथ सुरक्षा का भाव भी प्रदान करती है।
इस विशेष कुबेर-भैरव-लक्ष्मी पूजा में शुक्रवार के दिन वैदिक विधि से अनुष्ठान किया जाएगा। इसमें आचार्य द्वारा 11,000 कुबेर मंत्रों का जाप किया जाएगा, जिसे जीवन में धन और नए अवसरों को आकर्षित करने वाला माना जाता है। इसके बाद श्री सूक्त हवन के माध्यम से माँ लक्ष्मी से घर-परिवार में शुभता और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। अंत में श्री बटुक भैरव कवच का पाठ किया जाता है, जिसे परिवार और धन-संपत्ति के चारों ओर दिव्य सुरक्षा कवच बनाने वाला माना जाता है।
यह पवित्र अनुष्ठान तमिलनाडु के प्राचीन एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर में सम्पन्न होगा, जो अपने आप में एक दुर्लभ अवसर है। श्री मंदिर के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष पूजा जीवन में धन की प्राप्ति, उसकी सुरक्षा और लंबे समय तक बनी रहने वाली समृद्धि का आशीर्वाद देने की भावना से की जाती है।