🛕 वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाएँ, अंतर्ज्ञान और मानसिक शांति का कारक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब जन्म कुंडली में चंद्र कमजोर या पीड़ित स्थिति में हो, तो व्यक्ति के मन में बेचैनी, बार बार विचारों का घूमना, भावनात्मक असंतुलन या नींद से जुड़ी परेशानी अनुभव हो सकती है। चंद्र ग्रह शांति विशेष पूजा को पारंपरिक रूप से ऐसे समय में मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की कामना से किया जाने वाला एक आध्यात्मिक उपाय माना जाता है।
🛕 इस पूजा का मुख्य भाग है 11000 चंद्र मंत्र जाप, जिसमें चंद्र देव की शीतल, कोमल और पोषण देने वाली ऊर्जा का स्मरण किया जाता है। मंत्रों की यह धारा मन की गहराइयों तक शांति का भाव पहुंचाने का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही चंद्रमौलिश्वर रुद्राभिषेक किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के उस स्वरूप की उपासना होती है, जिनके मस्तक पर चंद्र विराजमान हैं। यह स्वरूप मन और चेतना के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों अनुष्ठानों का संयुक्त प्रभाव मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता से जोड़ा जाता है।
🛕 यह पवित्र अनुष्ठान श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में नर्मदा नदी के पावन तट पर संपन्न हो रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिव्य स्थल पर की गई उपासना मन की गहराइयों को शांत करने और भीतर की अशांति को धीरे-धीरे स्थिर करने में सहायक होती है। नर्मदा का प्रवाह और शिव की उपस्थिति मिलकर एक गहन आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं, जो साधक को भीतर से जुड़ने का अवसर देता है।
🛕 सभी विधि विधान अनुभवी वैदिक पंडितों द्वारा शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार किए जाते हैं। संकल्प, मंत्र जाप और अभिषेक श्रद्धालु के नाम और गोत्र से संपन्न किए जाते हैं, जिससे पूजा एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव बनती है। भक्त ऑनलाइन माध्यम से भी इस पूजा से जुड़ सकते हैं और दूर रहकर भी भावनात्मक रूप से अनुष्ठान का हिस्सा बन सकते हैं।