सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और स्वयं सिद्ध तिथि माना जाता है। इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है, यानी उसका प्रभाव कभी कम नहीं होता और समय के साथ बढ़ता ही रहता है। इसलिए इस दिन की गई पूजा विशेष रूप से जीवन में स्थायी धन, समृद्धि और सुख लाने वाली मानी जाती है।
इसी पावन अवसर पर यह विशेष लक्ष्मी-नारायण एवं पितृ सेवा महापूजा आयोजित की जा रही है। यह पूजा केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पितरों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने का भी विशेष महत्व है। जब देवी-देवताओं की कृपा और पितरों का आशीर्वाद एक साथ मिलता है, तब जीवन में स्थिरता, सफलता और सुख का मार्ग अपने आप बनता है।
इस महापूजा में 1100 श्री सूक्त पाठ और 1100 पुरुष सूक्त पाठ किया जाएगा। श्री सूक्त मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है और इसका पाठ जीवन में धन, समृद्धि और स्थिरता लाने के लिए किया जाता है। वहीं पुरुष सूक्त भगवान विष्णु को समर्पित है। जब इन दोनों का पाठ एक साथ किया जाता है, तो लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में संतुलन, सुख और निरंतर प्रगति प्रदान करती है।
अक्षय तृतीया के इस शुभ दिन इन दोनों स्तोत्रों का 1100 बार पाठ इस अनुष्ठान को अत्यंत प्रभावशाली बना देता है। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक साधना है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थिरता लाने में सहायक मानी जाती है।
इसके साथ ही इस पूजा में पितृ सेवा का भी विशेष स्थान है। अन्न दान, जल दान और पितृ तर्पण के माध्यम से पूर्वजों को श्रद्धा पूर्वक अर्पण किया जाएगा। मान्यता है कि जब पितरों को श्रद्धा से तर्पण और दान किया जाता है, तो वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
जब पितर संतुष्ट होते हैं, तो जीवन में आ रही रुकावटें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, मन में शांति आती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ने लगती है। इसलिए इस पूजा में देवी-देवताओं की उपासना के साथ-साथ पितरों की सेवा को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।
यह अनुष्ठान हमें यह सिखाता है कि जीवन में केवल आगे बढ़ना ही नहीं, बल्कि अपने मूल और पूर्वजों का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। जब हम श्रद्धा से अपने पितरों को याद करते हैं और उनके लिए दान व तर्पण करते हैं, तो यह हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। अक्षय तृतीया का शुभ समय, लक्ष्मी-नारायण की कृपा और पितरों की सेवा—इन तीनों का संगम इस पूजा को अत्यंत विशेष और प्रभावशाली बनाता है। यह पूजा जीवन में धन, स्थिरता, शांति और समृद्धि लाने का एक दिव्य माध्यम है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से इस अक्षय तृतीया विशेष लक्ष्मी-नारायण एवं पितृ सेवा महापूजा में भाग लेकर आप भी अपने नाम से संकल्प जोड़ सकते हैं और जीवन में धन, सुख, स्थिरता और पितरों के आशीर्वाद की प्राप्ति कर सकते हैं।