वर्ष की सबसे बड़ी शनि अमावस्या के पावन अवसर पर एक अत्यंत विशेष शनि-हनुमान महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जब अमावस्या शनिवार के दिन आती है, तो उसे शनि अमावस्या कहा जाता है, जो शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। साथ ही यह दिन हनुमान जी की कृपा पाने के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि शनि देव हनुमान जी के भक्तों पर भी विशेष कृपा रखते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति करने वालों पर शनि देव के कठिन प्रभाव भी धीरे-धीरे शांत हो जाते हैं और जीवन में संतुलन आने लगता है। जब जीवन में बार-बार आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव या बिना कारण रुकावटें आने लगें, तब इस तरह का संयुक्त अनुष्ठान एक मजबूत आध्यात्मिक सहारा बनता है।
शनि अमावस्या के इस पावन अवसर पर यह अनुष्ठान दो शक्तिशाली स्थानों - डबरा के नवग्रह मंदिर और उज्जैन के खेड़ापति हनुमान मंदिर में संपन्न होगा। इस अनुष्ठान में 11 ब्राह्मणों द्वारा 100 हनुमान चालीसा महायज्ञ और 23,000 शनि मंत्रों से पीपल समिधा महायज्ञ किया जाएगा।
🔥 100 हनुमान चालीसा पाठ का महत्व
इस अनुष्ठान में 11 ब्राह्मणों द्वारा 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा जो कि अत्यंत शक्तिशाली है। हनुमान चालीसा में भी कहा गया है -
“जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई।”
अर्थात जो व्यक्ति 100 बार इसका पाठ करता है, वह जीवन के बंधनों और परेशानियों से राहत पाकर सुख प्राप्त करता है। इसलिए यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो कोर्ट केस, कर्ज या जीवन की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
इस अनुष्ठान की एक खास बात यह है कि इसमें हर चौपाई के साथ आहुति दी जाएगी। शास्त्रों में यज्ञ का महत्व बहुत बड़ा बताया गया है, इसलिए जब पाठ और यज्ञ एक साथ किए जाते हैं, तो उसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। ऐसा अनुष्ठान जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है।
🌑 23,000 शनि मंत्र के साथ पीपल समिधा महायज्ञ का महत्व
इस विशेष पूजा में 23,000 शनि मंत्रों के साथ पीपल की समिधा (लकड़ी) से यज्ञ किया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में शनि से जुड़े अनुष्ठानों में पीपल की समिधा का विशेष महत्व बताया गया है। पीपल वृक्ष को बहुत पवित्र माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीपल का वृक्ष शनि देव को अत्यंत प्रिय होता है। इसलिए शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की विशेष रूप से पूजा करने और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाने की मान्यता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है - मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में भगवान विष्णु और ऊपर भगवान शिव का निवास बताया गया है। इसी कारण इस यज्ञ की शक्ति और भी बढ़ जाती है।
🌸 शनि और हनुमान की संयुक्त कृपा
भगवान हनुमान को संकटों को दूर करने वाला और साहस देने वाला माना जाता है, वहीं शनि देव जीवन में अनुशासन और संतुलन लाते हैं। जब इन दोनों की पूजा एक साथ की जाती है, तो यह अनुष्ठान जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से आप भी दुर्लभ समय पर होने वाले इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर शनि देव और हनुमान जी की संयुक्त कृपा प्राप्त कर सकते हैं।