घर या जमीन का स्वामित्व केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं होता, बल्कि यह जीवन की शांति, स्वास्थ्य और स्थिर भविष्य का आधार माना जाता है। फिर भी कई लोगों के जीवन में एक ही समस्या बार-बार देखने को मिलती है- पैसे तैयार होते हैं, कागज़ी प्रक्रिया आगे बढ़ती है, लेकिन अचानक रुकावट आ जाती है। कभी कोर्ट-कचहरी का मामला लंबा चलने लगता है, कभी डील टूट जाती है, या नए घर में जाने के बाद भी मन अशांत रहता है। शास्त्रों में इसे भूमि ऊर्जा के असंतुलन से जुड़ा माना गया है, क्योंकि जब भूमि से जुड़ी शक्ति स्थिर नहीं होती, तो जीवन भी स्थिर नहीं हो पाता।
सनातन परंपरा में पृथ्वी और स्थिरता की रक्षा उस दिव्य शक्ति से मानी गई है, जिसने स्वयं पृथ्वी का उद्धार किया था। जब हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को सागर में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर उसे पुनः स्थापित किया। उसी दिव्य शक्ति से माँ वराही प्रकट हुईं—जो भूमि की रक्षा करने वाली, जीवन को स्थिर करने वाली और छिपी हुई बाधाओं से सुरक्षा देने वाली मानी जाती हैं। इसी कारण प्रॉपर्टी, वास्तु और भूमि विवादों से जुड़ी समस्याओं में माँ वराही की उपासना को विशेष फलदायी माना गया है।
पुराणों में माँ वराही को ऐसी दिव्य रक्षक शक्ति बताया गया है, जो बार-बार असफलता, कानूनी उलझनों और भूमि से जुड़े विवादों को शांत करने का सामर्थ्य रखती हैं। जैसे उन्होंने देवताओं के लिए पृथ्वी को स्थिर किया, उसी प्रकार उनकी कृपा से साधक के घर, स्वास्थ्य और जीवन की दिशा में स्थिरता आने की भावना जुड़ी होती है। जो लोग घर खरीदने में देरी, भूमि विवाद, वास्तु दोष या पारिवारिक शांति में कमी का अनुभव करते हैं, उनके लिए यह पूजा एक विशेष आध्यात्मिक उपाय मानी जाती है।
इस चैत्र कृष्ण अष्टमी पर होने वाली इस महापूजा का संकल्प भी इसी उद्देश्य से रखा गया है। 11 विद्वान ब्राह्मण मिलकर 501 बार वराही कवच का पाठ करेंगे, जिससे साधक के घर, भूमि और परिवार के चारों ओर एक दिव्य सुरक्षा घेरा बनने की भावना जुड़ी होती है। इसके साथ 21 किलो पिसी हल्दी से महायज्ञ किया जाएगा। हल्दी माँ वराही को अत्यंत प्रिय मानी जाती है और यह भूमि शुद्धि, दोष शांति और स्थिरता का प्रतीक है।
जब यज्ञ की अग्नि में आहुति दी जाती है, तब यह प्रार्थना की जाती है कि प्रॉपर्टी से जुड़े कानूनी कार्यों की बाधाएँ दूर हों, वास्तु दोष शांत हों और जीवन की जड़ में स्थिरता स्थापित हो। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में अपने नाम से संकल्प जोड़कर साधक माँ वराही की कृपा से भूमि सुरक्षा, प्रॉपर्टी समाधान और जीवन में स्थायी संतुलन की कामना कर सकते हैं।