चैत्र कृष्ण अष्टमी का दिन मां शीतला को समर्पित माना जाता है। इस दिन को शीतला अष्टमी के रूप में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शीतला रोगों, संक्रमण और अचानक आने वाली शारीरिक परेशानियों से रक्षा करने वाली देवी हैं। उनका स्वरूप शीतलता, करुणा और उपचार की शक्ति का प्रतीक है।
पुराणों के अनुसार, जब पृथ्वी पर चेचक, ज्वर और संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ा और जनजीवन भयग्रस्त हो गया, तब देवताओं की प्रार्थना पर मां शीतला प्रकट हुईं। अपने शीतल, करुणामयी स्वरूप से उन्होंने रोगों की तीव्रता को शांत किया। नीम, कलश और झाड़ू से युक्त उनका स्वरूप रोग-नाश, शुद्धि और जन-रक्षा का प्रतीक माना जाता है और इसी कारण आज भी स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोग-निवारण के लिए मां शीतला की पूजा की जाती है।
शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर 108 शीतलाष्टक पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शीतलाष्टक में मां शीतला की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन है। जब इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ 108 बार किया जाता है, तो यह साधना मन और शरीर दोनों को शांति देने वाली मानी जाती है। यह पाठ न केवल रोगों से बचाव के लिए किया जाता है, बल्कि जीवन में चल रही अदृश्य बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए भी किया जाता है।
इस विशेष अनुष्ठान में 21 किलो केसर चंदन अर्पण भी किया जाता है। केसर और चंदन दोनों ही शीतलता, पवित्रता और उपचार की ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। मां शीतला का स्वभाव भी शीतल और करुणामयी है, इसलिए यह अर्पण उनके स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन इतनी मात्रा में केसर चंदन अर्पित करने से साधक और उसके परिवार के चारों ओर एक दीर्घकालिक रक्षा कवच बनता है, जो अचानक होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।
आज के समय में जब अचानक बीमारियां, तनाव और अनजानी परेशानियां जीवन का हिस्सा बन गई हैं, तब शीतला अष्टमी का यह विशेष अनुष्ठान परिवार की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जो भक्त शत्रु बाधा, पुरानी बीमारी, बुरी नजर या छिपी समस्याओं से परेशान हैं, उनके लिए यह पूजा आशा और विश्वास का माध्यम बन सकती है। श्रद्धा से किया गया यह अनुष्ठान केवल बाहरी कष्टों को शांत करने के लिए नहीं, बल्कि मन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव जगाने के लिए भी किया जाता है।
🙏मां शीतला की कृपा से जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और सकारात्मकता बनी रहे- इसी भावना के साथ श्री मंदिर द्वारा यह विशेष पूजा संपन्न कराई जा रही है। आप भी इस पूजा से जुड़कर अच्छा स्वास्थ्य और जीवन में संतुलन का लाभ उठा सकते हैं।