जब रविवार का दिन पुष्य नक्षत्र के साथ आता है, तब अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली रवि पुष्य योग बनता है। वैदिक परंपरा में इसे ऐसा दिव्य समय माना गया है जब किए गए जप, हवन और शांति अनुष्ठान का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह काल केवल बाधाओं को कम करने का नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता, सम्मान और निरंतर प्रगति की नींव रखने का अवसर माना जाता है।
इस विशेष महापूजा की विधि एक गहन आध्यात्मिक क्रम में संपन्न होती है- पहले शनि की शांति, फिर सूर्य की कृपा का आह्वान और अंत में पुनः शनि से संरक्षण की प्रार्थना। शनि देव को कर्मफलदाता कहा गया है। जब उनका प्रभाव भारी होता है, तब जीवन में देरी, बार-बार असफलता, कानूनी उलझनें, करियर में रुकावट या बिना कारण मेहनत का फल न मिलना जैसी स्थितियाँ बनती हैं। 108 शनि कवच का पाठ कर्मजन्य बोझ को शांत करने और साढ़ेसाती व ढैया के प्रभाव को कम करने की भावना से किया जाता है।
इसके बाद 108 सूर्य कवच के माध्यम से आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता, पहचान और आगे बढ़ने की ऊर्जा को जागृत करने की प्रार्थना की जाती है। सूर्य देव को सफलता, नेतृत्व, स्पष्टता और आत्मबल का प्रतीक माना गया है। उनकी कृपा से भय कम होने, सही अवसर मिलने और जीवन में सम्मान बढ़ने की मान्यता है। अंत में पुनः शनि का स्मरण कर प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा को स्थिर करने और जीवन को बार-बार आने वाली बाधाओं से सुरक्षित रखने की भावना से अनुष्ठान पूर्ण किया जाता है। इस प्रकार यह पूजा कर्म शुद्धि → आत्मबल जागरण → दीर्घकालिक संरक्षण की आध्यात्मिक प्रक्रिया का प्रतीक मानी जाती है।
यह महापूजा 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा उज्जैन स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में संपन्न होती है। क्षिप्रा तट पर स्थित यह पावन स्थान ग्रह शांति और ज्योतिषीय दोषों के निवारण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य ने शनि की पीड़ा से राहत मिलने के बाद इस मंदिर की स्थापना कराई थी। यहाँ शनि देव की पूजा शिव स्वरूप में की जाती है और श्रद्धालु तेल अर्पित कर अपनी प्रार्थना करते हैं।
जो लोग बार-बार प्रयास करने के बाद भी सफलता से दूर हैं, करियर या व्यापार में धीमी गति का अनुभव कर रहे हैं, सरकारी या कानूनी कार्यों में रुकावट का सामना कर रहे हैं या जीवन में बिना किसी कारण के देरी से परेशान हैं- उनके लिए यह अनुष्ठान विशेष फलदायी माना जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन महापूजा में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप शनि देव के न्याय और सूर्य देव के तेज का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में स्थिर सफलता, आत्मविश्वास और सुरक्षा का अनुभव कर सकते हैं।