कई बार जीवन में सच्चे मन से प्रयास करने के बाद भी महत्वपूर्ण कार्यों में बार-बार रुकावटें आने लगती हैं। विवाह की बातें आगे बढ़ते-बढ़ते रुक जाती हैं, परिवार में छोटी-छोटी बातों से मनमुटाव बढ़ने लगता है और करियर या आर्थिक स्थिति में भी प्रगति धीमी महसूस होने लगती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ऐसी परिस्थितियां कई बार कुंडली में बृहस्पति और मंगल के असंतुलित प्रभाव से जुड़ी मानी जाती हैं। जब बृहस्पति देव कमजोर स्थिति में होते हैं या मंगल से संबंधित दोष प्रभाव डालते हैं, तब शुभ कार्यों जैसे विवाह, मांगलिक कार्य और परिवार की स्थिरता में देरी आ सकती है। ऐसे समय में बृहस्पति देव और मंगल देव की पूजा तथा विशेष अनुष्ठान जीवन में मार्गदर्शन, सामंजस्य और सकारात्मक बदलाव लाने वाले माने जाते हैं।
इस वर्ष एक अत्यंत शुभ ग्रह संयोग बन रहा है क्योंकि 12 वर्षों बाद बृहस्पति देव मंगलवार के दिन कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में कर्क राशि को बृहस्पति की उच्च राशि माना जाता है। वहीं मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित होता है। गुरु के उच्च गोचर और मंगलवार के इस विशेष संयोग को विवाह सुख, पारिवारिक समृद्धि और जीवन में सकारात्मक उन्नति से जुड़े उपायों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे दुर्लभ ग्रह संयोगों के समय की गई पूजा और साधना विशेष फल प्रदान करती है।
इन्हीं दिव्य आशीर्वादों को प्राप्त करने के लिए काशी में वैदिक विधि-विधान से 108 बृहस्पति कवच पाठ, 108 मंगल कवच पाठ एवं हवन का आयोजन किया जा रहा है। इस पवित्र अनुष्ठान में कवच पाठ और हवन के माध्यम से ग्रहों से जुड़ी बाधाओं को शांत करने, रिश्तों में मधुरता लाने, मांगलिक कार्यों में सफलता और पारिवारिक जीवन में स्थिरता के लिए प्रार्थना की जाएगी। मान्यता है कि यह अनुष्ठान सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करता है, दोषों से बनने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करता है और शुभ अवसरों तथा समृद्धि के मार्ग खोलता है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब मंगल ग्रह कुंडली में शुभ स्थिति में नहीं होते, तब मांगलिक दोष के कारण विवाह में रुकावटें, योग्य जीवनसाथी मिलने में देरी और रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। मंगल देव को विवाह, पारिवारिक सुख, आत्मविश्वास और जीवन के शुभ आरंभ का कारक माना जाता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि बृहस्पति देव मंगल देव के गुरु हैं, इसलिए जब बृहस्पति शुभ होते हैं, तब मंगल के सकारात्मक प्रभाव भी मजबूत होने लगते हैं। इस वर्ष 2 जून को 12 वर्षों बाद बृहस्पति देव अपनी उच्च और अत्यंत प्रभावशाली राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, इस दुर्लभ ग्रह संयोग के समय बृहस्पति देव और मंगल देव की संयुक्त पूजा, कवच पाठ और हवन विवाह सुख, रिश्तों में सामंजस्य, समृद्धि, सकारात्मकता और जीवन की उन्नति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र पूजा में शामिल होकर भक्त बृहस्पति देव और मंगल देव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और विवाह सुख, पारिवारिक समृद्धि, सकारात्मक उन्नति तथा जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता की कामना कर सकते हैं। 🙏