सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस तिथि पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। वैदिक ज्योतिष की इसी गणितीय गणना के आधार पर कुंभ मेले का भी आयोजन किया जाता है। यह तिथि भगवान सूर्यदेव को समर्पित है। सूर्य देव सभी नवग्रहों के स्वामी है, यही कारण है कि मकर संक्रांति पर नवग्रह शांति पूजा पूजा शुभ मानी जाती है। इसलिए श्री मंदिर द्वारा मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर प्रयागराज में स्थित त्रिवेणी संगम पर नवग्रह शांति पूजा, सर्व कार्य सिद्धि महायज्ञ एवं संगम सूर्य अर्घ्य का आयोजन कराया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में सूर्य मजबूत हो, तो वह सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है, अज्ञात शत्रुओं को उजागर कर उन्हें शक्तिहीन करता है, और आत्मविश्वास एवं सफलता प्रदान करता है।
इसके विपरीत, यदि सूर्य कमजोर हो, तो व्यक्ति को अज्ञात शत्रुओं, नकारात्मकता, और बुरी शक्तियों का सामना करना पड़ सकता है। मान्यता है कि नवग्रह शांति पूजा करने से नवग्रहों के दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में संतुलन बना रहता है। यह पूजा ग्रहों के अशुभ प्रभाव को समाप्त कर शुभता और सकारात्मकता का संचार करती है। वहीं सर्व कार्य सिद्धि महा हवन एक दिव्य अग्नि अनुष्ठान है, जो मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इस हवन में विशेष मंत्रोच्चार के साथ अग्नि में आहुतियां दी जाती हैं। बात करें अगर सूर्य अर्घ्य कि तो शास्त्रों में वर्णित है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने से मान, सम्मान की प्राप्ति होती है। अगर आप भी पूरे वर्ष के लिए अज्ञात शत्रुओं, नकारात्मकता और बुरी शक्तियों से सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो अभी श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा को बुक करें।