सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ दिवस माना गया है। देवों के देव महादेव वे हैं जो अपने भक्तों के दुःखों को अपने भीतर समाहित कर उन्हें शांति और स्थिरता में परिवर्तित करते हैं। इस दिन भगवान शिव की आराधना और अभिषेक करने से भक्त अपनी गहन भक्ति व्यक्त करते हैं और अपने घर, परिवार तथा जीवन की यात्रा में दिव्य संरक्षण की कामना करते हैं। यह वह समय होता है जब व्यक्ति अपनी चिंताओं और दुःखों को भगवान को समर्पित कर, अपनी आस्था को नवीनीकृत करता है और भगवान शिव की उपस्थिति से जीवन में स्पष्टता, संतुलन और शांति का अनुभव करता है।
गृहस्थ जीवन में शांति, स्थिरता और आरोग्य की प्राप्ति हेतु श्री मंदिर द्वारा विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पर किया जा रहा है। यह पवित्र तीर्थस्थल अपनी प्रबल आध्यात्मिक ऊर्जा, उपचार शक्ति और अटूट भक्ति के लिए प्रसिद्ध है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, घुष्मा नामक एक परम भक्त महिला ने अपनी अखंड श्रद्धा और कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रकट होकर घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हुए। ऐसा माना जाता है कि इस पावन स्थल पर रुद्राभिषेक करने से नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और आर्थिक कठिनाइयों का निवारण होता है।
इस पवित्र अनुष्ठान में शिवलिंग का अभिषेक भगवान शिव के प्रिय द्रव्यों- जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से किया जाता है। इसके साथ वैदिक मंत्रोच्चार और हवन का आयोजन भी संपन्न किया जाता है। यह पूजा जीवन में शक्ति, स्थिरता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उपचार का संचार करती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं, बुरी दृष्टि से रक्षा मिलती है और शारीरिक एवं मानसिक आरोग्य की प्राप्ति होती है।
🙏 श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पर इस विशेष रुद्राभिषेक में सम्मिलित होकर भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त करें। अपने शरीर और मन में संतुलन स्थापित करें तथा अपने परिवार के लिए आरोग्य, सुरक्षा और शांति का शुभ आशीर्वाद प्राप्त करें।