फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण सनातन परंपरा में अत्यंत प्रभावशाली और सिद्धि प्रदान करने वाला समय माना जाता है। मान्यता है कि इस काल में योग्य ब्राह्मणों द्वारा विधि–विधान से किया गया मंत्र जाप और अनुष्ठान सामान्य दिनों की तुलना में अधिक जागृत और शीघ्र फलदायी होता है। ग्रहण के समय सूक्ष्म ऊर्जा सक्रिय होती है, इसलिए इस अवधि में की गई साधना सीधे मन, ग्रहों और जीवन की दिशा पर सकारात्मक प्रभाव डालने की भावना से जुड़ी होती है।
इस विशेष काल में माँ बगलामुखी की उपासना का महत्व और भी बढ़ जाता है। माँ बगलामुखी को नकारात्मकता, शत्रु बाधा, अचानक आने वाली समस्याओं और जीवन में रुकावट पैदा करने वाली शक्तियों को शांत करने वाली देवी माना जाता है। वहीं चंद्र देव मन की शांति, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन के कारक हैं। जब चंद्र ग्रहण के प्रभावशाली समय में इन दोनों की संयुक्त साधना की जाती है, तब इसे जीवन में स्थिरता, स्पष्टता और उन्नति का मार्ग बनाने वाली साधना माना जाता है।
इस दिव्य अनुष्ठान में 1,00,008 बगलामुखी बीज मंत्र जाप और 11,000 चंद्र विशेष मंत्र जाप किया जाएगा। बगलामुखी बीज मंत्र का जाप नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और शत्रु बाधा को स्तंभित करने का प्रतीक माना जाता है, वहीं चंद्र मंत्र जाप मन की अशांति को शांत कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम होता है। ग्रहण काल में इन दोनों मंत्रों का संयुक्त जाप कठिन ग्रह दशा को संतुलित करने, बार-बार होने वाली आर्थिक हानि, स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों और आय में अस्थिरता को कम करने की भावना से किया जाता है।
आज के समय में कई लोग लगातार प्रयास करने के बाद भी आय में स्थिरता नहीं बना पाते, अचानक खर्च बढ़ जाता है, स्वास्थ्य बार-बार प्रभावित होता है या अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह स्थिति नकारात्मक प्रभावों या अशुभ ग्रह दशा से भी जुड़ी हो सकती है। चंद्र ग्रहण के इस पावन समय में किया गया यह सिद्धि अनुष्ठान जीवन से ऐसे अवरोधों को कम कर नई संभावनाओं के द्वार खोलने की प्रार्थना का माध्यम माना जाता है।
यह विशेष साधना प्रयागराज के श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर और हरिद्वार के माँ बगलामुखी मंदिर में संपन्न की जा रही है। भगवान शिव को चंद्रमा का अधिष्ठाता देव माना जाता है और सोमेश्वर रूप में उनकी उपासना चंद्र से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। वहीं हरिद्वार स्थित माँ बगलामुखी का पवित्र स्थान नकारात्मक शक्तियों को स्तंभित करने और शत्रु बाधा को शांत करने के लिए प्रसिद्ध है। जब चंद्र शांति और बगलामुखी साधना इन दोनों तीर्थों में एक साथ की जाती है, तब इसे मन, ग्रह दशा और जीवन में स्थिरता लाने वाला अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक संयोग माना जाता है।
माँ बगलामुखी की दिव्य शक्ति को स्तंभन शक्ति कहा गया है, अर्थात् जो नकारात्मकता, विरोध और बाधाओं को वहीं रोक देती हैं। ग्रहण काल में की गई उनकी साधना विशेष प्रभावशाली मानी जाती है और इसे शीघ्र सकारात्मक परिणाम देने वाली साधना के रूप में देखा जाता है। चंद्र मंत्रों के साथ यह संयुक्त अनुष्ठान मन, धन और जीवन की दिशा में संतुलन लाने की भावना से किया जाता है, जिससे सकारात्मक अवसर, आय में वृद्धि और स्थिरता का मार्ग बन सके।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन चंद्र ग्रहण अनुष्ठान में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप माँ बगलामुखी और चंद्र देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह साधना जीवन से नकारात्मकता कम करने, मानसिक शांति पाने, आर्थिक स्थिरता लाने और नई उन्नति के अवसरों को आकर्षित करने की प्रार्थना का दिव्य माध्यम मानी जाती है।