इस वर्ष 19 मार्च, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आरंभ हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिन नौ देवियों की शक्ति का प्रतीक हैं। प्रत्येक दिन देवी मां की आराधना और उनकी कृपा पाने के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन, यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर एक दिव्य और शक्तिशाली अनुष्ठान, महाविद्या अग्नि रक्षा महा कवच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस विशेष अनुष्ठान का उद्देश्य भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र और जीवन में आने वाली अदृश्य बाधाओं से बचाकर देवी मां की दिव्य सुरक्षा का आशीर्वाद प्रदान करना है।
नवरात्रि के समय देवी मां की ऊर्जा अत्यंत सक्रिय मानी जाती है। इस पावन समय में माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। इन दोनों देवियों को महाविद्याओं में अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप माना गया है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं और नकारात्मक शक्तियों को शांत करने वाली मानी जाती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, माँ बगलामुखी वह शक्ति हैं जो शत्रु की वाणी और हानिकारक कर्मों को रोकने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी कृपा से विरोध करने वाली शक्तियाँ शांत होती हैं और जीवन में आत्मविश्वास तथा स्थिरता आती है। वहीं माँ प्रत्यंगिरा को देवी शक्ति का अत्यंत उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है। उनका स्मरण नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र और मानसिक भय को शांत करने में सहायक माना जाता है। नवरात्रि के पवित्र पहले दिन जब इन दोनों देवियों की आराधना साथ में की जाती है, तो यह भक्त के चारों ओर एक शक्तिशाली आध्यात्मिक सुरक्षा का भाव उत्पन्न करती है।
इसी दिव्य भावना के साथ सिद्धपीठ माँ बगलामुखी मंदिर, हरिद्वार में यह पवित्र अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। इस अनुष्ठान में 100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ किया जाएगा। लाल मिर्च की अग्नि आहुति का आध्यात्मिक अर्थ यह माना जाता है कि जीवन में मौजूद ईर्ष्या, नकारात्मकता और बुरी नज़र जैसी ऊर्जा अग्नि में समर्पित होकर शांत हो जाती हैं। इसके साथ ही विद्वान आचार्यों द्वारा 1,25,000 माँ बगलामुखी मूल मंत्रों का जाप किया जाएगा। मंत्रों की यह सामूहिक साधना भक्तों के लिए देवी की कृपा और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के लिए की जाती है। मंत्र जाप के साथ बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान भी संपन्न होगा, जिसमें विशेष विधि से देवी शक्ति का स्मरण कर भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन की कामना की जाती है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल होकर माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में दिव्य सुरक्षा और सकारात्मकता का आशीर्वाद पा सकते हैं। 🙏