कई बार जीवन ऐसा लगता है जैसे लगातार प्रयास करने के बाद भी रास्ते में बाधाएँ आती रहती हैं। घर में अजीब सा भारीपन महसूस होता है, काम में अचानक रुकावट आने लगती है या आसपास के लोगों की नज़र का प्रभाव मन को बेचैन कर देता है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की रात ऐसा समय होता है जब वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है, जिससे परिवार असुरक्षित या अशांत महसूस कर सकता है। ऐसे समय में पवित्र अग्नि की शक्ति एक दिव्य कवच की तरह काम करती है, जो अपने प्रियजनों की रक्षा करती है और जीवन में शांति का मार्ग बनाती है।
इस दिव्य रक्षा का महत्व भक्त प्रह्लाद की कथा में भी देखने को मिलता है। जब होलिका ने अपनी अग्नि से प्रह्लाद को नष्ट करना चाहा, तब उनकी अटूट भक्ति ने अग्नि को ही उनकी रक्षा का साधन बना दिया। होलिका रूपी नकारात्मकता अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित रहे। इसी कारण होलिका दहन की अग्नि को आज भी बुरी शक्तियों और बुरी नज़र को समाप्त करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।
हरिद्वार में होने वाले इस विशेष अनुष्ठान में पवित्र अग्नि में 100 किलो लाल मिर्च की आहुति दी जाती है। जैसे लाल मिर्च का धुआँ कीटों को दूर करता है, उसी प्रकार यह अग्नि आहुति शत्रुओं की नकारात्मक सोच और छिपी हुई बाधाओं को समाप्त करने का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा के 1,25,000 मूल मंत्रों का सामूहिक जाप जीवन के चारों ओर एक दिव्य कवच बनाने की भावना से किया जाता है। होलिका की अग्नि के साथ यह साधना आपके भय, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और चिंताओं को जलाकर देवी की शीतल कृपा का आशीर्वाद प्रदान करने की प्रार्थना है।
श्री मंदिर के माध्यम से किया जाने वाला यह विशेष अनुष्ठान आपके जीवन में दिव्य रक्षा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने की भावना से किया जाता है।