🪔 सनातन परंपरा में माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा को रक्षा, शत्रु बाधा कम करने और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने वाली महाविद्याओं के रूप में पूजा जाता है। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं मानी जाती हैं। मान्यता है कि वे शत्रुओं की हानिकारक वाणी और प्रभाव को शांत करती हैं और जीवन में विजय का मार्ग खोलती हैं। माँ प्रत्यंगिरा को भगवान नरसिंह और आदि शक्ति के संयुक्त स्वरूप के रूप में माना जाता है, जो बुरी शक्तियों और अदृश्य नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने वाली रक्षक देवी हैं। इन दोनों देवियों की संयुक्त उपासना से अग्नि रक्षा कवच की स्थापना की भावना जुड़ी मानी जाती है, जो भक्त को नजर, विरोध और आध्यात्मिक अशांति से बचाने का प्रतीक है।
🪔 अमावस्या की रात्रि को शुद्धि और सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रभावशाली समय माना जाता है। इस पावन अवसर पर अमावस्या महाविद्या अग्नि रक्षा महाकवच अनुष्ठान किया जाएगा। मान्यता है कि अमावस्या पर की गई महाविद्या उपासना दोषों को कम करने, नकारात्मक प्रभावों को दूर करने और आध्यात्मिक सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होती है।
🔥 इस अनुष्ठान के दौरान मंदिर में 100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ किया जाएगा, जो शत्रु प्रभाव, नजर दोष और छिपी बाधाओं को अग्नि में समर्पित कर समाप्त करने का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही विद्वान आचार्यों द्वारा 1,25,000 माँ बगलामुखी मूल मंत्र जाप किया जाएगा और बगलामुखी–प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान संपन्न होगा। यह संपूर्ण पूजा साहस, स्थिरता और सुरक्षा की भावना से जुड़ी मानी जाती है।
🪔 यह विशेष पूजा उन भक्तों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो नजर दोष, ईर्ष्या, छिपे विरोध, बार-बार आने वाली बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा चाहते हैं। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में संकल्प जोड़कर भक्त माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा की दिव्य रक्षा कृपा प्राप्त करने की भावना से जुड़ सकते हैं।
🙏 इस विशेष पूजा में भाग लेकर माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा के दिव्य रक्षा कवच का आशीर्वाद प्राप्त करें।