गुप्त नवरात्रि, जिसे “गोपनीय नवरात्रि” भी कहा जाता है, एक विशेष समय है जो महाविद्याओं की पूजा और आध्यात्मिक परिवर्तन के लिए विशेष माना जाता है। यह समय छिपी हुई शक्तियों को जाग्रत करने और कर्मों की शुद्धि के लिए प्रभावी माना जाता है। इस समयकाल में 10 भुजा वाले महा गणेश की साधना भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है, जोकि महाविद्याओं के द्वारपाल हैं। वे काली, शनि और केतु की शक्तियों को अपने में समेटे हुए हैं और केवल वही उन ‘ग्रंथियों’ को खोल सकते हैं, जो हमारे जीवन में बाधाएँ और अवरोध पैदा करती हैं। इनके आशीर्वाद के बिना गुप्त नवरात्रि की ऊर्जा हमारे जीवन में आसानी से नहीं आ पाती।
कहते हैं कि जो भक्त 10 भुजा वाले महा गणेश की पूजा में शामिल होते हैं, उन्हें छिपी हुई बाधाओं और कर्मबद्ध कठिनाइयों को पार करने में मदद मिल सकतती है। इस अवसर पर अमावस्या के खास तिथि पर 10 भुजा गणेश जी का पंचामृत से अभिषेक और 1008 हरिद्र-मूल हवन का आयोजन किया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार पंचामृत अभिषेक मूर्ति को शुद्ध और ऊर्जावान बनाता है, जबकि हरिद्र-मूल हवन अग्नि अनुष्ठान नकारात्मक प्रभावों को दूर करने और कर्मबद्ध गाँठों को खोलने में सहायक माना जाता है। इस पूजा को गुप्त नवरात्रि आरंभ से पहले करवाने से नवरात्रि की शक्तियाँ सहजता से जीवन में प्रवेश कर सकती हैं।
यह पूजा उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है, जो लगातार बाधाओं, देरी, लक्ष्य या करियर में रुकावट, परिवार में असंतुलन या छिपी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। 10 भुजाधारी महा गणेश के आशीर्वाद से भक्त अपने जीवन में स्पष्टता, आत्मविश्वास और संतुलन का अनुभव कर सकते हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से भक्त घर बैठे भी इस अनुष्ठान में भाग लेकर सभी परेशानियों से राहत, कर्मबद्ध गाँठों का निवारण और जीवन में सुगम शुरुआत की कामना कर सकते हैं।