🤔शनिदेव को माँ यशोदा ने बाल कृष्ण को देखने से क्यों किया था मना ?
🌟मथुरा को क्यों माना जाता है शनिदेव और भगवान कृष्ण दोनों के लिए पूजनीय स्थान ?🙏
एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, और भगवान कृष्ण उनके प्रमुख अवतारों में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को आनंद, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है। विशेष रूप से मथुरा, जो श्री कृष्ण का जन्मस्थान है, इस अवसर पर भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मथुरा के पास कोकिलावन में स्थित शनिदेव मंदिर से जुड़ी एक रोचक कथा प्रचलित है। जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, तो बृजमंडल में सभी देवी-देवता उनके दर्शन के लिए आए। शनिदेव भी भगवान कृष्ण से मिलने पहुँचे, लेकिन माता यशोदा ने उन्हें बालक कृष्ण के पास जाने से रोक दिया। ऐसा माना जाता है कि शनिदेव की वक्र दृष्टि का प्रभाव कठोर होता है, और माता यशोदा को यह भय था कि कहीं उनके बालक पर उसका असर न पड़े। माता यशोदा के इस निर्णय से शनिदेव दुखी हो गए और वे बृज क्षेत्र के एक वन में जाकर घोर तपस्या करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण स्वयं कोयल (कोकिला) के रूप में उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें दर्शन दिए। श्री कृष्ण ने शनिदेव को यह आशीर्वाद दिया कि जो कोई भी इस स्थान पर श्रद्धा और भक्ति से शनिदेव की पूजा करेगा, उसे शनिदेव और स्वयं भगवान कृष्ण, दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। तभी से यह वन कोकिलावन के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
ऐसा माना जाता है कि श्री शनि देव मंदिर, कोसी कलां, मथुरा में शनि-कृष्ण पूजा और शनि तिल तेल अभिषेक करने से भक्तों को दोनों देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। शनिदेव को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुरूप फल देते हैं। वहीं, भगवान कृष्ण अपनी करुणा और दिव्य ज्ञान से भक्तों के जीवन में आने वाले कर्म संबंधी अवरोधों को दूर करने में सहायता करते हैं। महाभारत में श्री कृष्ण ने अर्जुन का मार्गदर्शन करके उसे धर्म और कर्तव्य का सही ज्ञान दिया था। उसी तरह इस पूजा में उनकी उपस्थिति भक्तों को उनके उच्च उद्देश्य के साथ जुड़ने और पिछले कर्मों द्वारा बनाई गई बाधाओं पर काबू पाने में सहायता करती है। शनिदेव की कृपा से व्यक्ति में धैर्य और सहनशीलता विकसित होती है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहता है और निरंतर प्रयास के माध्यम से प्रगति करता है। दूसरी ओर, भगवान कृष्ण की कृपा से जीवन में संतुलन, हल्कापन और आध्यात्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है। विशेषकर एकादशी तिथि को भक्तों के लिए आत्मबल, शक्ति और दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त करने का अत्यंत शुभ समय माना जाता है। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से कोसीकलां में स्थित श्री शनिदेव मंदिर में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में भाग लें और भगवान कृष्ण और शनिदेव की संयुक्त कृपा प्राप्त करें।