🚩 इस बुधवार भगवान गणेश के आशीर्वाद से जीवन से नकारात्मकता और बाधाओं को करें दूर✨
🛕 जानें विघ्नहर्ता के जन्मस्थान से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
हिंदू धर्म के अनुसार, बुधवार को भगवान गणेश को समर्पित किया जाता है, जोकि बुद्धि, समृद्धि और शुभ आरंभ के देवता माने जाते हैं। उन्हें 'विघ्नहर्ता' (विघ्नों का नाश करने वाला) और 'अष्टविनायक' के रूप में पूजा जाता है, जो उनके आठ दिव्य रूपों को दर्शाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी विघ्नों का नाश होता है और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसीलिए इस पवित्र अवसर पर श्री मंदिर, उत्तराखंड के गणेश डोडिताल मंदिर में विशेष 11,000 विघ्नहर्ता गणेश मूल मंत्र जाप और अष्टविनायक हवन का आयोजन कर रहा है, जोकि भगवान गणेश की जन्मभूमि मानी जाती है। यह मंदिर भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश की सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। वहीं भगवान गणेश की 'विघ्नहर्ता' रूप में पूजा करने से जीवन के विघ्न समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, अष्टविनायक भगवान गणेश के आठ विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और प्रत्येक रूप की पूजा से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। ये आठ रूप हैं - वक्रतुण्ड, एकदंत, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण और सातवां रूप, विघ्नराज, भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त करने और दिव्य सुरक्षा देने के लिए जाना जाता है।
यही कारण है कि भक्तगण बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करते हैं, विशेष रूप से उनके विघ्नराज रूप की, ताकि नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और बाधाओं से मुक्ति मिल सके। शास्त्रों में भी भगवान गणेश के इस रूप को प्रसन्न करने और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विघ्नहर्ता गणेश मूल मंत्र जाप और अष्टविनायक हवन करने का विशेष उल्लेख मिलता है। दरअसल विघ्नहर्ता गणेश मूल मंत्र – "ॐ गं गणपतये नमः" – भगवान गणेश को समर्पित एक प्रभावशाली मंत्र है, जिसका अर्थ है – "हे भगवान, मुझे अपने दिव्य गुणों को आत्मसात करने का आशीर्वाद दें।" ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है और सभी चुनौतियों एवं बाधाओं का निवारण होता है। वहीं, अष्टविनायक हवन भगवान गणेश के आठ रूपों को समर्पित एक पवित्र अग्नि अनुष्ठान है, जिसमें प्रत्येक रूप के लिए विशिष्ट मंत्रों का जाप करते हुए पवित्र अग्नि में प्रसाद अर्पित किया जाता है। यह अनुष्ठान नकारात्मक ऊर्जा और उनके हानिकारक प्रभावों से रक्षा करने में सहायक माना जाता है। इसीलिए बुधवार के दिन गणेश जी के जन्मस्थल उत्तरकाशी स्थित डोडीताल गणेश मंदिर में 11,000 विघ्नहर्ता गणेश मूल मंत्र जाप एवं अष्टविनायक हवन का आयोजन किया जा रहा है। आप भी इस विशेष पूजा में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लें और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।