Sri Mandir

✦ पितृ-पक्ष विशेष ✦

26 सितंबर - 10 अक्टूबर, 2026

अपने पितरों के स्मरण, समर्पण और उनकी आत्मा की शांति के लिए इस पितृ-पक्ष करें उचित पूजा-विधियाँ।

वैदिक नियमों, पूर्वजों के आधार पर उचित विधियां

अपने पितृजन के पुण्यतिथि पर अनुष्ठान करें

प्रमुख स्थलों- जैसे गया, काशी में पितृ पूजा विधि

300K+ पूजाएँ संपन्न4.9★ पूजा सेवा रेटिंग13.5k रिव्यूज

पितृ पक्ष का महत्व

पितृ पक्ष क्या है?

साल में 16 तिथियां ऐसी आती हैं जो आपके पूर्वजों को समर्पित होती हैं। इन अवधि में श्रद्धा पूर्वक किया गया अनुष्ठान या सेवा सीधे आपके पूर्वजों तक पहुँचता है और उन्हें साल भर शांति और तृप्ति देता है

पितृ-पूजन के लाभ

पितृ पक्ष में पूजा-विधि क्यों करने चाहिए?

पितृ आशीर्वाद

जब पितृ संतुष्ट होते हैं तो उनका आशीर्वाद परिवार में सुख और समृद्धि लाता है

पितृ ऋण मुक्ति

हम जो कुछ भी हैं अपने पूर्वजों की वजह से हैं। पितृ पक्ष उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है

परिवार कल्याण

किसी भी दोष का समाधान पाने और कुल की प्रगति के लिए

पितृ-पक्ष के पवित्र अनुष्ठान

पितृ-पक्ष में कौन से पूजा-विधियाँ करवायी जाती है?

श्राद्ध

श्राद्ध

पूर्वजों के लिए श्रद्धा और सम्मान के साथ विधिपूर्वक किया जाने वाला अनुष्ठान

तर्पण

तर्पण

पवित्र जल और तिल अर्पित करके पितरों तक अपनी प्रार्थना पहुँचाना

पिंड दान

पिंड दान

चावल और तिल से बने पिंड अर्पित करना जो पितरों के शरीर का प्रतीक है। ये पितृ मुक्ति का सबसे प्राचीन विधान है

ब्राह्मण और पंचबली सेवा

ब्राह्मण और पंचबली सेवा

शास्त्र कहते हैं ब्राह्मण, गौ, कौवा, श्वान, चींटी, और देवताओं को दिया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुँचता है

मार्गदर्शन

सही पूजा-विधि कैसे चुनें?

01

अपने पितरों को चुनें

आपके पितृजन, जिनके स्मृति में आप पूजा-विधि करवाना चाहते है

02

निधन का कारण बताएँ

प्राकृतिक मृत्यु और आकस्मिक/अचानक मृत्यु के लिए अलग-अलग पूजा-विधि मानी जाती हैं

03

पितरों की पुण्य-तिथि बताएँ

जिस तिथि को पूर्वज विदा हुए थे, उसी तिथि पर पूजा-विधि विशेष फलदायी है, लेकिन तिथि ज्ञात ना हो तो अमावस्या पर विधियाँ उतना ही फलदायी माना जाता है।

04

श्रीमंदिर की सहायता से उचित पूजा-विधि प्राप करें

वैदिक नियमों और आपके पितरों के विवरण के आधार पर हम आपको प्रमुख स्थलों- जैसे गया, गोकर्ण, काशी में सबसे उत्तम पितृ पूजा-विधि बतायेंगे

क्या ऑनलाइन पूजा उतनी ही प्रभावशाली है जितनी व्यक्तिगत पूजा?

स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार, भक्त को पूजा का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकता है, भले ही वह स्वयं पूजा स्थल पर उपस्थित न हो, इसके लिए पूजा के दौरान उनका नाम-गोत्र और संकल्प विधिपूर्वक लिया जाना आवश्यक है। सही वैदिक विधि, श्रद्धा और पवित्रता के साथ की गई ऑनलाइन पूजा भी प्रत्यक्ष रूप से की गई पूजा के समान ही शुभ और प्रभावी मानी जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण है - विश्वास, मन की भावना और सही विधि-विधान

सही पितृ पूजा-विधि से भक्तों का लाभ

4.9
3 मिलियन से अधिक भक्तों द्वारा विश्वसनीय

मुझे पता ही नहीं था पापा के लिए कौनसी पूजा करनी है.. हर साल अमावस्या पर ही करवा देते थे, यहाँ सारी जानकारी देने के बाद पता चला क्या पूजा करनी चाहिए 🙏

सुरेश पाटिल

एक-पिंडी श्राद्ध पूजा | 02 अगस्त 2026

मेरे चाचा जी की मृत्यु दुर्घटना में हुई थी, उसके लिए अलग पूजा होती है ये हमें पता ही नहीं था। पहले सब पूछा उसके बाद पूजा बताई ये अच्छा लगा

रोहित कुमार

नारायण बली पूजा | 15 अगस्त 2026

I live in London and after a recent death in the family it was not possible for us to travel to Gaya or Kashi. I was worried doing it online may not feel genuine, but they shared the puja details, priest information and proof after completion. We could see everything and knew the rituals were actually done for our family

सूरज सिन्हा

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा | 15 अगस्त 2026

पिताजी की सही तिथि नहीं पता थी इसलिए लग रहा था पूजा कैसे होगी.. पर तिथि नहीं पता होने पर भी उन्होंने पूजा बताई, धन्यवाद 🙏

कुलदीप यादव

गया पिंड दान | 04 अगस्त 2026

अक्सर पूछे गए प्रश्न

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