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5 जनवरी, 2027

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त्रयोदशी कृष्ण पक्ष,मंगलवार
पौष मास
हेमंत,सिद्धार्थ 2083
त्रयोदशी कृष्ण पक्ष,मंगलवार
पौष मास
हेमंत,सिद्धार्थ 2083
त्यौहार
प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
त्यौहार
प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि

शुभ-अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त
11:43 AM से 12:25 PM
11:43 AM से 12:25 PM
राहुकाल
राहुकाल
2:43 PM से 4:03 PM
2:43 PM से 4:03 PM
गुलिक काल
गुलिक काल
12:04 PM से 1:24 PM
12:04 PM से 1:24 PM
यमघण्टकाल
यमघण्टकाल
9:25 AM से 10:44 AM
9:25 AM से 10:44 AM

आज का पंचांग

तिथि
कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
8:40 PM तक
8:40 PM तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा
3:08 AM तक
3:08 AM तक
योग
गंड
12:44 PM तक
12:44 PM तक
करण
गर
7:26 AM तक
7:26 AM तक
महीना अमान्त
मृगशिरा
महीना पूर्णिमांत
पौष
विक्रम संवत
2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत
1948 (प्रभाउ)
सूर्य राशि
धनु
चंद्र राशि
वृश्चिक
दिशाशूल
उत्तर
चंद्र निवास
उत्तर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन
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ठाकुर प्रसाद मासिक पंचांग देखें
Upcoming festivals
3 January, 2027
सफला एकादशी
5 January, 2027
प्रदोष व्रत
5 January, 2027
मासिक शिवरात्रि
7 January, 2027
पौष अमावस्या
7 January, 2027
दर्शवेला अमावस्या
7 January, 2027
हनुमान जयंती
9 January, 2027
चन्द्र दर्शन
11 January, 2027
विनायक चतुर्थी
13 January, 2027
स्कन्द षष्ठी
14 January, 2027
लोहड़ी
15 January, 2027
गुरु गोबिन्द सिंह जयन्ती
15 January, 2027
पोंगल
15 January, 2027
मकर संक्रान्ति
15 January, 2027
माघ बिहु
16 January, 2027
मासिक दुर्गाष्टमी
16 January, 2027
शाकम्भरी उत्सवारम्भ
18 January, 2027
पौष पुत्रदा एकादशी
18 January, 2027
मासिक कार्तिगाई
19 January, 2027
गौण पौष पुत्रदा एकादशी
19 January, 2027
वैष्णव पौष पुत्रदा एकादशी
19 January, 2027
कूर्म द्वादशी
19 January, 2027
रोहिणी व्रत
20 January, 2027
प्रदोष व्रत
22 January, 2027
पौष पूर्णिमा
22 January, 2027
शाकम्भरी पूर्णिमा
22 January, 2027
पूर्णिमा उपवास
22 January, 2027
थाई पूसम
23 January, 2027
माघ प्रारम्भ *उत्तर
23 January, 2027
सुभाष चन्द्र बोस जयन्ती
25 January, 2027
संकष्टी चतुर्थी
25 January, 2027
सकट चौथ
26 January, 2027
गणतन्त्र दिवस
29 January, 2027
कालाष्टमी
शिशिर जी द्वारा रात्रि माँ काली महायज्ञ 408 आहुतियों के साथ विशेष भैरव बाबा आरती
शिशिर जी द्वारा काली चौदस की रात्रि पूजा LIVE

शिशिर जी द्वारा रात्रि माँ काली महायज्ञ 408 आहुतियों के साथ विशेष भैरव बाबा आरती

बुरी नज़र और नकारात्मकता से सुरक्षा के लिए

puja venue
राँची वाले भैरव बाबा मंदिर, राँची, झारखंड
puja date
7 नवम्बर, शनिवार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप, काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ
काली चौदस निशीथ काल विशेष — वर्ष की सबसे अंधकारमय रात

21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप, काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ

माँ काली, भैरव और माँ तारा की सुरक्षा प्राप्त करना, जीवन की बाधाओं को दूर करना तथा धन-समृद्धि को आकर्षित करना

puja venue
शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
puja date
7 नवम्बर, शनिवार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
सुरक्षा और समृद्धि के लिए भव्य दिवाली 5 देवी 5 शक्तिपीठ महारत्रि महायज्ञ
5 शक्तिपीठ दिवाली विशेष महापूजा

सुरक्षा और समृद्धि के लिए भव्य दिवाली 5 देवी 5 शक्तिपीठ महारत्रि महायज्ञ

दिवाली पर महाशक्ति के पांच परम पीठों की पूजा करके सुरक्षा, समृद्धि, पूर्णता और सामंजस्य का आह्वान करने के लिए

puja venue
मां ललिता माता शक्तिपीठ, कालीघाट शक्तिपीठ, महालक्ष्मी अंबाबाई शक्तिपीठ, मां विंध्यवासिनी शक्तिपीठ, मां उमा कात्यायनी शक्तिपीठ, प्रयागराज, कोलकाता, मिर्जापुर, वृंदावन, कोल्हापुर
puja date
8 नवम्बर, रविवार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (सुबह 11:27 बजे तक)
महाकाल नगरी स्थित महामृत्युंजय मठ, महाकाल लोक में भस्म अभिषेक, संपूर्ण श्रृंगार एवं रुद्राभिषेक पूजा
सोमवती अमावस्या: महाकाल लोक उज्जैन भस्म आरती विशेष

महाकाल नगरी स्थित महामृत्युंजय मठ, महाकाल लोक में भस्म अभिषेक, संपूर्ण श्रृंगार एवं रुद्राभिषेक पूजा

नकारात्मकता और छिपी हुई बाधाओं से रक्षा तथा भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए

puja venue
मृत्युंजय मठ, महाकाल लोक, महाकाल नगरी, उज्जैन, मध्य प्रदेश
puja date
9 नवम्बर, सोमवार, कार्तिक कृष्ण अमावस्या
100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ एवं बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान के साथ 1,25,000 मूल मंत्र जाप
महाविद्या अग्नि रक्षा महा कवच विशेष

100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ एवं बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान के साथ 1,25,000 मूल मंत्र जाप

शत्रुओं पर विजय और कानूनी मामलों में सफल परिणामों के लिए मां बगलामुखी से आशीर्वाद

puja venue
सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर, हरिद्वार
puja date
7 नवम्बर, शनिवार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (सुबह 10:47 बजे के बाद)

सम्पूर्ण पंचांग, Varanasi, Uttar Pradesh, India

आज का दिन Varanasi, Uttar Pradesh, India के भक्तों के लिए आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मंगलवार को हम पौष के पवित्र माह में त्रयोदशी कृष्ण पक्ष पक्ष की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी का पालन करते हैं। हेमंत ऋतु के चलते सूर्य धनु में संचार कर रहा है, जबकि चंद्रमा वृश्चिक में स्थित है। पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 8:40 PM तक तक सक्रिय रहेगी, इसके बाद अगली तिथि प्रारंभ होगी। आज का नक्षत्र ज्येष्ठा है, जो 3:08 AM तक तक रहेगा, इसके पश्चात अगला नक्षत्र आरंभ होगा। आज का योग गंड है, जो 12:44 PM तक तक प्रभावी रहेगा। दिन की शुरुआत में करण गर है, जो 7:26 AM तक तक रहेगा।

Varanasi, Uttar Pradesh, India में आज सूर्योदय 6:45 AM पर और सूर्यास्त 5:23 PM पर होगा, जो दिन की आध्यात्मिक लय को परिभाषित करता है। चंद्रमा का उदय 4:42 AM पर और अस्त 3:10 PM पर होगा। दिशाओं की दृष्टि से आज दिशा शूल उत्तर दिशा में है, अतः इस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले अदरक या गुड़ का सेवन करने जैसे पारंपरिक उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। आज चंद्रमा उत्तर दिशा में स्थित है, जो मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11:43 AM से 12:25 PM के बीच आता है, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम है। हालांकि, कुछ अशुभ कालों से बचना चाहिए। राहुकाल 2:43 PM से 4:03 PM, गुलिक काल 12:04 PM से 1:24 PM, और यमगंड काल 7:28 AM से 8:53 AM के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है।

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आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

पंचांग हिंदू धर्म में समय और तिथियों को समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण साधन है। यह भारतीय ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर दिन के सभी प्रमुख पहलुओं की जानकारी प्रदान करता है। आज के दिन की गतिविधियों को सफल और शुभ बनाने के लिए पंचांग का उपयोग करना अत्यंत लाभकारी होता है। इसमें प्रमुख रूप से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त की जानकारी होती है। आइए जानते हैं आज के पंचांग की विस्तार से जानकारी।

तिथि

तिथि पंचांग का एक प्रमुख हिस्सा होती है। तिथि से यह ज्ञात होता है कि चंद्रमा की स्थिति किस प्रकार की है और आज का दिन कौन सा है। हिंदू धर्म में हर तिथि का अपना महत्व है, जैसे एकादशी व्रत, पूर्णिमा या अमावस्या पर विशेष पूजा और व्रत किए जाते हैं। आज की तिथि जानकर आप अपने धार्मिक कार्यों को सही समय पर कर सकते हैं।

वार

वार यानी सप्ताह का दिन। पंचांग के अनुसार, हर वार का भी अपना महत्व होता है। जैसे सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है, मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है। वार से यह पता चलता है कि आज किस देवता की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए ताकि दिन शुभ रहे।

नक्षत्र

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति को दर्शाते हैं। पूरे दिन में कौन सा नक्षत्र चल रहा है, इसका ज्ञान पंचांग से होता है। शुभ कार्यों के लिए नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। कुछ नक्षत्र शुभ होते हैं जिनमें शादी, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य किए जाते हैं, जबकि कुछ नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं जिनमें इन कार्यों को टाला जाता है।

योग

पंचांग में योग भी शामिल होता है, जो कि समय के अनुसार बदलता रहता है। योग का ज्ञान शुभ-अशुभ घटनाओं का संकेत देता है। अगर आज कोई शुभ योग है, तो यह किसी विशेष कार्य की सफलता का सूचक हो सकता है। वहीं, अशुभ योग होने पर कार्य को स्थगित करना उचित माना जाता है।

करण

करण पंचांग का वह हिस्सा है जो तिथि को दो हिस्सों में विभाजित करता है। यह बताता है कि किस समय का उपयोग शुभ कार्यों के लिए किया जा सकता है। करण का सही ज्ञान होने से आप अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं और अनुकूल समय में अपने कार्यों को संपन्न कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त

आज का पंचांग शुभ मुहूर्त की जानकारी भी देता है। हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। चाहे वह विवाह हो, व्यापार का आरंभ हो या फिर कोई धार्मिक अनुष्ठान हो, शुभ मुहूर्त जानकर आप अपने कार्यों को सफल बना सकते हैं। पंचांग में दिन के अनुसार, सबसे शुभ समय को बताया जाता है जिसे 'अभिजीत मुहूर्त' भी कहा जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

आज के पंचांग में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का भी विशेष उल्लेख होता है। हिंदू धर्म में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। सूर्योदय के समय किए गए धार्मिक कार्य अधिक फलदायी होते हैं। साथ ही, शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

आज का चंद्रमा और चंद्रदर्शन

पंचांग में चंद्रमा की स्थिति और चंद्रदर्शन की जानकारी भी दी जाती है। आज का चंद्रमा किस राशि में है और किस समय उगेगा, इसका विवरण पंचांग में दिया जाता है। व्रत या उपवास रखने वाले लोगों के लिए चंद्रदर्शन का विशेष महत्व होता है।

पंचांग के लाभ क्या हैं?

पंचांग एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है, जो पांच मुख्य तत्त्वों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का समन्वय करता है। ये सभी तत्व मिलकर दिन की गुणवत्ता और ऊर्जा को निर्धारित करते हैं। पंचांग का उपयोग ब्रह्मांडीय प्रभावों को समझने और अपने कार्यों को उनके अनुरूप ढालने के लिए किया जाता है।

पंचांग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शुभ और अशुभ समय की पहचान करने में मदद करता है। विवाह, यात्रा, नए कार्यों की शुरुआत या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त समय जानने के लिए पंचांग मार्गदर्शन करता है। यह सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त जैसे विवरण भी देता है, जो व्रत और पूजाओं के लिए आवश्यक होते हैं।

हमें प्रतिदिन पंचांग क्यों देखना चाहिए?

प्रतिदिन पंचांग देखने से हम अपने दैनिक जीवन को प्रकृति की लय के अनुरूप ढाल सकते हैं। यह राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे अशुभ समयों से सतर्क करता है, जब कोई नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

पंचांग का अनुसरण कर हम अनावश्यक समस्याओं से बच सकते हैं और अपने कार्यों की सफलता को बढ़ा सकते हैं। यह विशेष रूप से साधकों, ज्योतिषियों, किसानों और प्रकृति से सामंजस्य में जीने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है। संक्षेप में, पंचांग एक ब्रह्मांडीय योजनाकर्ता की तरह काम करता है, जो हमें एक सोच-समझकर, सफल और आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीने में मदद करता है।

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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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