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2 सितम्बर, 2026

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पंचमी कृष्ण पक्ष,बुधवार
भाद्रपद मास
वर्षा,सिद्धार्थ 2083
पंचमी कृष्ण पक्ष,बुधवार
भाद्रपद मास
वर्षा,सिद्धार्थ 2083
त्यौहार
बलराम जयन्ती, रांधण छठ *गुजरात
त्यौहार
बलराम जयन्ती, रांधण छठ *गुजरात

शुभ-अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त
11:18 AM से 12:08 PM
11:18 AM से 12:08 PM
राहुकाल
राहुकाल
11:43 AM से 1:17 PM
11:43 AM से 1:17 PM
गुलिक काल
गुलिक काल
10:09 AM से 11:43 AM
10:09 AM से 11:43 AM
यमघण्टकाल
यमघण्टकाल
7:01 AM से 8:35 AM
7:01 AM से 8:35 AM

आज का पंचांग

तिथि
कृष्ण पक्ष पंचमी
6:13 AM तक
6:13 AM तक
नक्षत्र
भरणी
1:44 AM तक
1:44 AM तक
योग
ध्रुव
9:13 PM तक
9:13 PM तक
करण
तैतिल
6:12 AM तक
6:12 AM तक
महीना अमान्त
श्रावण
महीना पूर्णिमांत
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत
1948 (प्रभाउ)
सूर्य राशि
सिंह
चंद्र राशि
मेष
दिशाशूल
उत्तर
चंद्र निवास
पूर्व
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन
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ठाकुर प्रसाद मासिक पंचांग देखें
Upcoming festivals
1 September, 2026
नाग पञ्चम *गुजरात
2 September, 2026
बलराम जयन्ती
2 September, 2026
रांधण छठ *गुजरात
3 September, 2026
शीतला सातम *गुजरात
3 September, 2026
मासिक कार्तिगाई
4 September, 2026
कृष्ण जन्माष्टमी
4 September, 2026
कालाष्टमी
4 September, 2026
आद्याकाली जयन्ती
4 September, 2026
अष्टमी रोहिणी
4 September, 2026
रोहिणी व्रत
5 September, 2026
दही हाण्डी
7 September, 2026
अजा एकादशी
8 September, 2026
पर्यूषण पर्वारम्भ
8 September, 2026
प्रदोष व्रत
10 September, 2026
दर्श अमावस्या
11 September, 2026
भाद्रपद अमावस्या
11 September, 2026
पिठोरी अमावस्या
11 September, 2026
पोला
11 September, 2026
वृषभोत्सव
12 September, 2026
चन्द्र दर्शन
12 September, 2026
सामवेद उपाकर्म
13 September, 2026
वराह जयन्ती
14 September, 2026
हरतालिका तीज
14 September, 2026
गौरी हब्बा
14 September, 2026
गणेश चतुर्थी
15 September, 2026
ऋषि पञ्चमी
15 September, 2026
सम्वत्सरी पर्व
16 September, 2026
स्कन्द षष्ठी
17 September, 2026
गौरी आवाहन
17 September, 2026
कन्या संक्रान्ति
17 September, 2026
विश्वकर्मा पूजा
18 September, 2026
ललिता सप्तमी
18 September, 2026
दूर्वा अष्टमी
18 September, 2026
गौरी पूजा
19 September, 2026
राधा अष्टमी
19 September, 2026
मासिक दुर्गाष्टमी
19 September, 2026
महालक्ष्मी व्रत आरम्भ
19 September, 2026
गौरी विसर्जन
23 September, 2026
वामन जयन्ती
23 September, 2026
कल्की द्वादशी
23 September, 2026
भुवनेश्वरी जयन्ती
23 September, 2026
शरद्कालीन सम्पात
24 September, 2026
प्रदोष व्रत
26 September, 2026
भाद्रपद पूर्णिमा
26 September, 2026
पूर्णिमा उपवास
26 September, 2026
पूर्णिमा श्राद्ध
27 September, 2026
आश्विन प्रारम्भ *उत्तर
27 September, 2026
प्रतिपदा श्राद्ध
29 September, 2026
महा भरणी
29 September, 2026
तृतीया श्राद्ध
29 September, 2026
संकष्टी चतुर्थी
30 September, 2026
चतुर्थी श्राद्ध
30 September, 2026
पञ्चमी श्राद्ध
21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप के साथ काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ
महाकाली जयंती एवं कालाष्टमी निशीथ काल विशेष: वर्ष की सबसे अंधेरी रातों में से एक

21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप के साथ काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ

मां काली, भगवान भैरव और मां तारा की कृपा से सुरक्षा प्राप्त करना, जीवन की बाधाओं को दूर करना तथा धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए

puja venue
शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
puja date
4 सितम्बर, शुक्रवार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
जन्माष्टमी संपूर्ण सेवा पूजा - अभिषेक, श्रृंगार, बांसुरी अर्पण, बाल भोग, माखन मिश्री और राधा नाम कीर्तन
श्रीकृष्ण की विभिन्न सेवाओं और पूजा सहित कृष्ण जन्माष्टमी का संपूर्ण उत्सव पैकेज

जन्माष्टमी संपूर्ण सेवा पूजा - अभिषेक, श्रृंगार, बांसुरी अर्पण, बाल भोग, माखन मिश्री और राधा नाम कीर्तन

श्रीकृष्ण और राधा के चरणों में समर्पण कर सुखमय और उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए उनकी कृपा पाने हेतु

puja venue
श्री राधा स्नेह बिहारी मंदिर, वृंदावन, उत्तर प्रदेश
puja date
4 सितम्बर, शुक्रवार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
21 ब्राह्मणों द्वारा 1,08,000 भैरव मूल मंत्र जाप, तंत्रयुक्त महायज्ञ एवं कालभैरवाष्टकम् पाठ
21 ब्राह्मण कालाष्टमी - काल भैरव काशी विशेष

21 ब्राह्मणों द्वारा 1,08,000 भैरव मूल मंत्र जाप, तंत्रयुक्त महायज्ञ एवं कालभैरवाष्टकम् पाठ

परम साहस, निडरता और आंतरिक कमजोरियों से रक्षा

puja venue
श्री काल भैरव मंदिर, काशी, उत्तर प्रदेश
puja date
4 सितम्बर, शुक्रवार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

सम्पूर्ण पंचांग, East Singhbhum, Jharkhand, India

आज का दिन East Singhbhum, Jharkhand, India के भक्तों के लिए आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बुधवार को हम भाद्रपद के पवित्र माह में पंचमी कृष्ण पक्ष पक्ष की कृष्ण पक्ष पंचमी का पालन करते हैं। वर्षा ऋतु के चलते सूर्य सिंह में संचार कर रहा है, जबकि चंद्रमा मेष में स्थित है। पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष पंचमी 6:13 AM तक तक सक्रिय रहेगी, इसके बाद अगली तिथि प्रारंभ होगी। आज का नक्षत्र भरणी है, जो 1:44 AM तक तक रहेगा, इसके पश्चात अगला नक्षत्र आरंभ होगा। आज का योग ध्रुव है, जो 9:13 PM तक तक प्रभावी रहेगा। दिन की शुरुआत में करण तैतिल है, जो 6:12 AM तक तक रहेगा।

East Singhbhum, Jharkhand, India में आज सूर्योदय 5:26 AM पर और सूर्यास्त 6:00 PM पर होगा, जो दिन की आध्यात्मिक लय को परिभाषित करता है। चंद्रमा का उदय 9:15 PM पर और अस्त 10:04 AM पर होगा। दिशाओं की दृष्टि से आज दिशा शूल उत्तर दिशा में है, अतः इस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले अदरक या गुड़ का सेवन करने जैसे पारंपरिक उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। आज चंद्रमा पूर्व दिशा में स्थित है, जो मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11:18 AM से 12:08 PM के बीच आता है, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम है। हालांकि, कुछ अशुभ कालों से बचना चाहिए। राहुकाल 11:43 AM से 1:17 PM, गुलिक काल 10:09 AM से 11:43 AM, और यमगंड काल 7:28 AM से 8:53 AM के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है।

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आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

पंचांग हिंदू धर्म में समय और तिथियों को समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण साधन है। यह भारतीय ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर दिन के सभी प्रमुख पहलुओं की जानकारी प्रदान करता है। आज के दिन की गतिविधियों को सफल और शुभ बनाने के लिए पंचांग का उपयोग करना अत्यंत लाभकारी होता है। इसमें प्रमुख रूप से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त की जानकारी होती है। आइए जानते हैं आज के पंचांग की विस्तार से जानकारी।

तिथि

तिथि पंचांग का एक प्रमुख हिस्सा होती है। तिथि से यह ज्ञात होता है कि चंद्रमा की स्थिति किस प्रकार की है और आज का दिन कौन सा है। हिंदू धर्म में हर तिथि का अपना महत्व है, जैसे एकादशी व्रत, पूर्णिमा या अमावस्या पर विशेष पूजा और व्रत किए जाते हैं। आज की तिथि जानकर आप अपने धार्मिक कार्यों को सही समय पर कर सकते हैं।

वार

वार यानी सप्ताह का दिन। पंचांग के अनुसार, हर वार का भी अपना महत्व होता है। जैसे सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है, मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है। वार से यह पता चलता है कि आज किस देवता की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए ताकि दिन शुभ रहे।

नक्षत्र

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति को दर्शाते हैं। पूरे दिन में कौन सा नक्षत्र चल रहा है, इसका ज्ञान पंचांग से होता है। शुभ कार्यों के लिए नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। कुछ नक्षत्र शुभ होते हैं जिनमें शादी, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य किए जाते हैं, जबकि कुछ नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं जिनमें इन कार्यों को टाला जाता है।

योग

पंचांग में योग भी शामिल होता है, जो कि समय के अनुसार बदलता रहता है। योग का ज्ञान शुभ-अशुभ घटनाओं का संकेत देता है। अगर आज कोई शुभ योग है, तो यह किसी विशेष कार्य की सफलता का सूचक हो सकता है। वहीं, अशुभ योग होने पर कार्य को स्थगित करना उचित माना जाता है।

करण

करण पंचांग का वह हिस्सा है जो तिथि को दो हिस्सों में विभाजित करता है। यह बताता है कि किस समय का उपयोग शुभ कार्यों के लिए किया जा सकता है। करण का सही ज्ञान होने से आप अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं और अनुकूल समय में अपने कार्यों को संपन्न कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त

आज का पंचांग शुभ मुहूर्त की जानकारी भी देता है। हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। चाहे वह विवाह हो, व्यापार का आरंभ हो या फिर कोई धार्मिक अनुष्ठान हो, शुभ मुहूर्त जानकर आप अपने कार्यों को सफल बना सकते हैं। पंचांग में दिन के अनुसार, सबसे शुभ समय को बताया जाता है जिसे 'अभिजीत मुहूर्त' भी कहा जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

आज के पंचांग में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का भी विशेष उल्लेख होता है। हिंदू धर्म में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। सूर्योदय के समय किए गए धार्मिक कार्य अधिक फलदायी होते हैं। साथ ही, शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

आज का चंद्रमा और चंद्रदर्शन

पंचांग में चंद्रमा की स्थिति और चंद्रदर्शन की जानकारी भी दी जाती है। आज का चंद्रमा किस राशि में है और किस समय उगेगा, इसका विवरण पंचांग में दिया जाता है। व्रत या उपवास रखने वाले लोगों के लिए चंद्रदर्शन का विशेष महत्व होता है।

पंचांग के लाभ क्या हैं?

पंचांग एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है, जो पांच मुख्य तत्त्वों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का समन्वय करता है। ये सभी तत्व मिलकर दिन की गुणवत्ता और ऊर्जा को निर्धारित करते हैं। पंचांग का उपयोग ब्रह्मांडीय प्रभावों को समझने और अपने कार्यों को उनके अनुरूप ढालने के लिए किया जाता है।

पंचांग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शुभ और अशुभ समय की पहचान करने में मदद करता है। विवाह, यात्रा, नए कार्यों की शुरुआत या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त समय जानने के लिए पंचांग मार्गदर्शन करता है। यह सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त जैसे विवरण भी देता है, जो व्रत और पूजाओं के लिए आवश्यक होते हैं।

हमें प्रतिदिन पंचांग क्यों देखना चाहिए?

प्रतिदिन पंचांग देखने से हम अपने दैनिक जीवन को प्रकृति की लय के अनुरूप ढाल सकते हैं। यह राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे अशुभ समयों से सतर्क करता है, जब कोई नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

पंचांग का अनुसरण कर हम अनावश्यक समस्याओं से बच सकते हैं और अपने कार्यों की सफलता को बढ़ा सकते हैं। यह विशेष रूप से साधकों, ज्योतिषियों, किसानों और प्रकृति से सामंजस्य में जीने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है। संक्षेप में, पंचांग एक ब्रह्मांडीय योजनाकर्ता की तरह काम करता है, जो हमें एक सोच-समझकर, सफल और आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीने में मदद करता है।

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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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