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17-10-2026
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17 अक्टूबर, 2026

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षष्ठी शुक्ल पक्ष,शनिवार
अश्विन मास
शरद,सिद्धार्थ 2083
षष्ठी शुक्ल पक्ष,शनिवार
अश्विन मास
शरद,सिद्धार्थ 2083
त्यौहार
सरस्वती पूजा, नवपत्रिका पूजा, नवपद ओली प्रारम्भ, तुला संक्रान्ति
त्यौहार
सरस्वती पूजा, नवपत्रिका पूजा, नवपद ओली प्रारम्भ, तुला संक्रान्ति

शुभ-अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त
11:11 AM से 11:57 AM
11:11 AM से 11:57 AM
राहुकाल
राहुकाल
8:40 AM से 10:07 AM
8:40 AM से 10:07 AM
गुलिक काल
गुलिक काल
5:47 AM से 7:13 AM
5:47 AM से 7:13 AM
यमघण्टकाल
यमघण्टकाल
1:00 PM से 2:27 PM
1:00 PM से 2:27 PM

आज का पंचांग

तिथि
शुक्ल पक्ष षष्ठी
5:55 AM तक
5:55 AM तक
नक्षत्र
मूल
9:48 AM तक
9:48 AM तक
योग
अतिगंड
11:03 PM तक
11:03 PM तक
करण
तैतिल
5:54 AM तक
5:54 AM तक
महीना अमान्त
अश्विन
महीना पूर्णिमांत
अश्विन
विक्रम संवत
2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत
1948 (प्रभाउ)
सूर्य राशि
कन्या
चंद्र राशि
धनु
दिशाशूल
पूर्व
चंद्र निवास
पूर्व
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन
Takur Calendar
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Upcoming festivals
1 October, 2026
Panchami Shraddha
2 October, 2026
Gandhi Jayanti
2 October, 2026
Rohini Vrat
2 October, 2026
Saptami Shraddha
2 October, 2026
Shashthi Shraddha
3 October, 2026
Ashtami Shraddha
3 October, 2026
Kalashtami
3 October, 2026
Mahalakshmi Vrat Ends
3 October, 2026
Masik Krishna Janmashtami
4 October, 2026
Jivitputrika Vrat
4 October, 2026
Navami Shraddha
5 October, 2026
दशमी श्राद्ध
6 October, 2026
इन्दिरा एकादशी
6 October, 2026
एकादशी श्राद्ध
7 October, 2026
मघा श्राद्ध
7 October, 2026
द्वादशी श्राद्ध
8 October, 2026
त्रयोदशी श्राद्ध
8 October, 2026
प्रदोष व्रत
8 October, 2026
मासिक शिवरात्रि
9 October, 2026
चतुर्दशी श्राद्ध
10 October, 2026
अश्विन अमावस्या
10 October, 2026
सर्वपित्री दर्श अमावस्या
10 October, 2026
सर्वपित्रू अमावस्या
11 October, 2026
नवरात्रि प्रारम्भ
11 October, 2026
घटस्थापना
11 October, 2026
महाराजा अग्रसेन जयन्ती
12 October, 2026
चन्द्र दर्शन
14 October, 2026
विनायक चतुर्थी
15 October, 2026
ललिता पञ्चमी
16 October, 2026
सरस्वती आवाहन
16 October, 2026
बिल्व निमन्त्रण
16 October, 2026
स्कन्द षष्ठी
16 October, 2026
कल्पारम्भ
17 October, 2026
सरस्वती पूजा
17 October, 2026
नवपत्रिका पूजा
17 October, 2026
नवपद ओली प्रारम्भ
17 October, 2026
तुला संक्रान्ति
18 October, 2026
सरस्वती बलिदान
19 October, 2026
दुर्गा अष्टमी
19 October, 2026
सन्धि पूजा
19 October, 2026
महा नवमी
19 October, 2026
सरस्वती विसर्जन
20 October, 2026
दुर्गा बलिदान
20 October, 2026
आयुध पूजा
20 October, 2026
दक्षिण सरस्वती पूजा
20 October, 2026
बंगाल महा नवमी
20 October, 2026
दुर्गा विसर्जन
20 October, 2026
दशहरा
20 October, 2026
विजयदशमी
21 October, 2026
बंगाल विजयदशमी
21 October, 2026
मैसूर दसरा
21 October, 2026
विद्यारम्भ दिन
21 October, 2026
मध्वाचार्य जयन्ती
22 October, 2026
पापांकुशा एकादशी
22 October, 2026
पद्मनाभ द्वादशी
23 October, 2026
Padmanabha Dwadashi
23 October, 2026
Pradosh Vrat
25 October, 2026
Kojagara Puja
25 October, 2026
Sharad Purnima
26 October, 2026
Anvadhan
26 October, 2026
Ashwin Purnima
26 October, 2026
Ashwin Purnima Vrat
26 October, 2026
Ashwina Navapada Oli Ends
26 October, 2026
Meerabai Jayanti
26 October, 2026
Valmiki Jayanti
27 October, 2026
Ishti
27 October, 2026
Kartika Begins *North
28 October, 2026
Atla Tadde
28 October, 2026
Masik Karthigai
29 October, 2026
Karwa Chauth
29 October, 2026
Rohini Vrat
29 October, 2026
Sankashti Chaturthi
1,25,000 मूल मंत्र जाप के साथ 100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ एवं बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान
नवरात्रि अष्टमी महाविद्या अग्नि रक्षा महाकवच विशेष

1,25,000 मूल मंत्र जाप के साथ 100 किलो लाल मिर्च अग्नि आहुति महायज्ञ एवं बगलामुखी-प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान

दुश्मनों पर विजय और कानूनी मामलों में सफलता के लिए माँ बगलामुखी का आशीर्वाद

puja venue
मां पीतांबरा पीठ, उज्जैन, मध्य प्रदेश
puja date
19 अक्टूबर, सोमवार, आश्विन शुक्ल अष्टमी
नवरात्रि अष्टमी 8 शक्तिपीठ महाशक्ति महायज्ञ, 1,25,000 नवार्ण मंत्र जाप और कन्या भोजन
8 शक्तिपीठ विशेष - नवरात्रि अष्टमी महापूजा

नवरात्रि अष्टमी 8 शक्तिपीठ महाशक्ति महायज्ञ, 1,25,000 नवार्ण मंत्र जाप और कन्या भोजन

8 शक्तिपीठों का आशीर्वाद पाने और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए

puja venue
कालीघाट शक्तिपीठ, ललिता माता शक्तिपीठ, मां तारापीठ शक्तिपीठ, मां विंध्यवासिनी शक्तिपीठ, महालक्ष्मी अंबाबाई शक्तिपीठ, भद्रकाली शक्तिपीठ, उमा कात्यायनी शक्तिपीठ, मंगलागौरी शक्तिपीठ, बीरभूम - पश्चिम बंगाल, कोलकाता - पश्चिम बंगाल, प्रयागराज - उत्तर प्रदेश, कुरुक्षेत्र - हरियाणा, मिर्जापुर - उत्तर प्रदेश, कोल्हापुर - महाराष्ट्र, वृंदावन - उत्तर प्रदेश, गया - बिहार
puja date
19 अक्टूबर, सोमवार, आश्विन शुक्ल अष्टमी
सप्तमी-अष्टमी-नवमी 3 तिथि 3 शक्तिपीठ महापूजन एवं 9 कन्या भोजन
सप्तमी-अष्टमी-नवमी 3 तिथि 3 शक्तिपीठ विशेष

सप्तमी-अष्टमी-नवमी 3 तिथि 3 शक्तिपीठ महापूजन एवं 9 कन्या भोजन

नकारात्मक ऊर्जा, दुर्घटनाओं और दुर्भाग्य से सुरक्षा के लिए

puja venue
माँ तारापीठ शक्तिपीठ, कालीघाट शक्तिपीठ, मंगलागौरी शक्तिपीठ, तारापीठ, कोलकाता, गया
puja date
17 अक्टूबर, शनिवार, आश्विन शुक्ल सप्तमी
अष्टमी दुर्गा चंडी हवन और नवमी 108 कन्या पूजन एवं भोजन
नवरात्रि अष्टमी-नवमी 108 कन्या महानुष्ठान

अष्टमी दुर्गा चंडी हवन और नवमी 108 कन्या पूजन एवं भोजन

सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के आशीर्वाद के लिए

puja venue
श्री नवदुर्गा मंदिर, कटरा
puja date
19 अक्टूबर, सोमवार, आश्विन शुक्ल अष्टमी (सुबह 10ः51 बजे तक)
21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप के साथ काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ
नवरात्रि सप्तमी एवं शनिवार माँ काली नज़र कवच विशेष

21,000 काली क्रीं बीज मंत्र जाप के साथ काली-भैरव-तारा तंत्र महाअनुष्ठान एवं उग्र शक्ति यज्ञ

माँ काली, भैरव और माँ तारा की रक्षा-कृपा का आह्वान एवं जीवन की बाधाओं को दूर कर धन-समृद्धि आकर्षित करने के लिए

puja venue
शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
puja date
17 अक्टूबर, शनिवार, आश्विन शुक्ल सप्तमी

सम्पूर्ण पंचांग, Hazaribag, Jharkhand, India

आज का दिन Hazaribag, Jharkhand, India के भक्तों के लिए आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस शनिवार को हम अश्विन के पवित्र माह में षष्ठी शुक्ल पक्ष पक्ष की शुक्ल पक्ष षष्ठी का पालन करते हैं। शरद ऋतु के चलते सूर्य कन्या में संचार कर रहा है, जबकि चंद्रमा धनु में स्थित है। पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष षष्ठी 5:55 AM तक तक सक्रिय रहेगी, इसके बाद अगली तिथि प्रारंभ होगी। आज का नक्षत्र मूल है, जो 9:48 AM तक तक रहेगा, इसके पश्चात अगला नक्षत्र आरंभ होगा। आज का योग अतिगंड है, जो 11:03 PM तक तक प्रभावी रहेगा। दिन की शुरुआत में करण तैतिल है, जो 5:54 AM तक तक रहेगा।

Hazaribag, Jharkhand, India में आज सूर्योदय 5:47 AM पर और सूर्यास्त 5:21 PM पर होगा, जो दिन की आध्यात्मिक लय को परिभाषित करता है। चंद्रमा का उदय 11:36 AM पर और अस्त 10:13 PM पर होगा। दिशाओं की दृष्टि से आज दिशा शूल पूर्व दिशा में है, अतः इस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले अदरक या गुड़ का सेवन करने जैसे पारंपरिक उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। आज चंद्रमा पूर्व दिशा में स्थित है, जो मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक ऊर्जा को प्रभावित करता है।

दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11:11 AM से 11:57 AM के बीच आता है, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम है। हालांकि, कुछ अशुभ कालों से बचना चाहिए। राहुकाल 8:40 AM से 10:07 AM, गुलिक काल 5:47 AM से 7:13 AM, और यमगंड काल 7:28 AM से 8:53 AM के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है।

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आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

पंचांग हिंदू धर्म में समय और तिथियों को समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण साधन है। यह भारतीय ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर दिन के सभी प्रमुख पहलुओं की जानकारी प्रदान करता है। आज के दिन की गतिविधियों को सफल और शुभ बनाने के लिए पंचांग का उपयोग करना अत्यंत लाभकारी होता है। इसमें प्रमुख रूप से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त की जानकारी होती है। आइए जानते हैं आज के पंचांग की विस्तार से जानकारी।

तिथि

तिथि पंचांग का एक प्रमुख हिस्सा होती है। तिथि से यह ज्ञात होता है कि चंद्रमा की स्थिति किस प्रकार की है और आज का दिन कौन सा है। हिंदू धर्म में हर तिथि का अपना महत्व है, जैसे एकादशी व्रत, पूर्णिमा या अमावस्या पर विशेष पूजा और व्रत किए जाते हैं। आज की तिथि जानकर आप अपने धार्मिक कार्यों को सही समय पर कर सकते हैं।

वार

वार यानी सप्ताह का दिन। पंचांग के अनुसार, हर वार का भी अपना महत्व होता है। जैसे सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है, मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है। वार से यह पता चलता है कि आज किस देवता की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए ताकि दिन शुभ रहे।

नक्षत्र

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति को दर्शाते हैं। पूरे दिन में कौन सा नक्षत्र चल रहा है, इसका ज्ञान पंचांग से होता है। शुभ कार्यों के लिए नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। कुछ नक्षत्र शुभ होते हैं जिनमें शादी, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य किए जाते हैं, जबकि कुछ नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं जिनमें इन कार्यों को टाला जाता है।

योग

पंचांग में योग भी शामिल होता है, जो कि समय के अनुसार बदलता रहता है। योग का ज्ञान शुभ-अशुभ घटनाओं का संकेत देता है। अगर आज कोई शुभ योग है, तो यह किसी विशेष कार्य की सफलता का सूचक हो सकता है। वहीं, अशुभ योग होने पर कार्य को स्थगित करना उचित माना जाता है।

करण

करण पंचांग का वह हिस्सा है जो तिथि को दो हिस्सों में विभाजित करता है। यह बताता है कि किस समय का उपयोग शुभ कार्यों के लिए किया जा सकता है। करण का सही ज्ञान होने से आप अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं और अनुकूल समय में अपने कार्यों को संपन्न कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त

आज का पंचांग शुभ मुहूर्त की जानकारी भी देता है। हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। चाहे वह विवाह हो, व्यापार का आरंभ हो या फिर कोई धार्मिक अनुष्ठान हो, शुभ मुहूर्त जानकर आप अपने कार्यों को सफल बना सकते हैं। पंचांग में दिन के अनुसार, सबसे शुभ समय को बताया जाता है जिसे 'अभिजीत मुहूर्त' भी कहा जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

आज के पंचांग में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का भी विशेष उल्लेख होता है। हिंदू धर्म में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। सूर्योदय के समय किए गए धार्मिक कार्य अधिक फलदायी होते हैं। साथ ही, शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

आज का चंद्रमा और चंद्रदर्शन

पंचांग में चंद्रमा की स्थिति और चंद्रदर्शन की जानकारी भी दी जाती है। आज का चंद्रमा किस राशि में है और किस समय उगेगा, इसका विवरण पंचांग में दिया जाता है। व्रत या उपवास रखने वाले लोगों के लिए चंद्रदर्शन का विशेष महत्व होता है।

पंचांग के लाभ क्या हैं?

पंचांग एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है, जो पांच मुख्य तत्त्वों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का समन्वय करता है। ये सभी तत्व मिलकर दिन की गुणवत्ता और ऊर्जा को निर्धारित करते हैं। पंचांग का उपयोग ब्रह्मांडीय प्रभावों को समझने और अपने कार्यों को उनके अनुरूप ढालने के लिए किया जाता है।

पंचांग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शुभ और अशुभ समय की पहचान करने में मदद करता है। विवाह, यात्रा, नए कार्यों की शुरुआत या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त समय जानने के लिए पंचांग मार्गदर्शन करता है। यह सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त जैसे विवरण भी देता है, जो व्रत और पूजाओं के लिए आवश्यक होते हैं।

हमें प्रतिदिन पंचांग क्यों देखना चाहिए?

प्रतिदिन पंचांग देखने से हम अपने दैनिक जीवन को प्रकृति की लय के अनुरूप ढाल सकते हैं। यह राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे अशुभ समयों से सतर्क करता है, जब कोई नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

पंचांग का अनुसरण कर हम अनावश्यक समस्याओं से बच सकते हैं और अपने कार्यों की सफलता को बढ़ा सकते हैं। यह विशेष रूप से साधकों, ज्योतिषियों, किसानों और प्रकृति से सामंजस्य में जीने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है। संक्षेप में, पंचांग एक ब्रह्मांडीय योजनाकर्ता की तरह काम करता है, जो हमें एक सोच-समझकर, सफल और आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीने में मदद करता है।

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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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