शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?
कोजागरी पूर्णिमा लक्ष्मी प्राकट्य उत्सव कुबेर-लक्ष्मी अनुष्ठान

1,25,000 कुबेर मंत्र जाप, 1,25,000 लक्ष्मी मंत्र जाप और 108 कमल फूल अर्पण कोजागरी पूर्णिमा महापूजा

धन संचय और बचत में वृद्धि, व्यापार में लाभ और आर्थिक विस्तार
temple venue
श्री गजलक्ष्मी मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
pooja date
25 अक्टूबर, रविवार, आश्विन शुक्ल चतुर्दशी (सुबह 11ः55 के बाद पूर्णिमा)
पूजा बुकिंग बंद होने में शेष समय:
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अब तक3,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं
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आपके पूरे पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग 2 दिनों में शेयर की जाएगी
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पूरे विधि द्वारा पूजा होगी
मंदिर के सर्वश्रेष्ठ पंडितजी आपकी पूजा करेंगे
विशेष मंत्र द्वारा कृपा मिलेगी icon
विशेष मंत्र द्वारा कृपा मिलेगी
भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र शेयर किया जाएगा
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आशीर्वाद बॉक्स
पूजा के बाद आशीर्वाद बॉक्स आपके घर पर पहुँचाया जाएगा

शरद पूर्णिमा को माँ लक्ष्मी के दिव्य प्राकट्य की रात क्यों माना जाता है?

हिंदू परंपरा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान माँ लक्ष्मी धन, सुंदरता और समृद्धि के दिव्य स्वरूप में प्रकट हुई थीं। शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। यह पावन अवसर लक्ष्मी प्राकट्य दिवस से जुड़ा है, इसलिए इसे धन-समृद्धि और शुभता की कामना करने का शुभ समय माना जाता है।

देवताओं के खजाने की देखभाल कौन करता है?

जिस तरह हर राज्य में धन की देखभाल और उसका प्रबंधन करने के लिए एक खजांची होता है, उसी तरह भगवान कुबेर को देवताओं का दिव्य खजांची माना जाता है। पवित्र मंत्र “यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये” भगवान कुबेर को धन और अनाज का स्वामी मानकर उनका सम्मान करता है। जहाँ माँ लक्ष्मी धन का दिव्य स्रोत मानी जाती हैं, वहीं भगवान कुबेर धन की रक्षा से जुड़े हैं। दोनों की पूजा धन-समृद्धि पाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने...

पूजा लाभ

puja benefits
धन संचय और बचत में वृद्धि
अत्यंत शुभ पूर्णिमा तिथि पर सवा लाख कुबेर मंत्र जाप से धन से जुड़ी परेशानियों और रुकावटों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। इस पूजा से भक्तों को लगातार धन संचय करने, पैसों का बेहतर प्रबंधन करने और परिवार की बचत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का आशीर्वाद मिलता है।
puja benefits
व्यापार में लाभ और विस्तार
रविवार को यह पवित्र अनुष्ठान करने से सफलता, मान-सम्मान और समृद्धि बढ़ने की कामना की जाती है। सवा लाख लक्ष्मी मंत्र जाप के साथ 108 कमल फूल अर्पित करने से कामकाज और व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर होने की प्रार्थना की जाती है। इससे व्यापार में लाभ और लगातार विस्तार के नए रास्ते खुलने की कामना की जाती है।
puja benefits
पूर्ण आर्थिक समृद्धि
कोजागरी पूर्णिमा वह पावन तिथि है, जिसे समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी के प्रकट होने के दिन के रूप में जाना जाता है। इस शुभ तिथि पर माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर की एक साथ पूजा करने से घर में सुख-शांति, दिव्य कृपा और लगातार आर्थिक प्रगति का आशीर्वाद मिलने की कामना की जाती है।

पूजा प्रक्रिया

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संकल्प

यजमान के नाम एवं गोत्र का उच्चारण करते हुए विधिवत संकल्प लिया जाएगा।
Number-1

गणपति पूजन

भगवान गणपति का पूजन विधिवत संपन्न किया जाएगा।
Number-2

मुख्य देवता स्थापना एवं षोडशोपचार पूजन

मुख्य देवता का आवाहन कर षोडशोपचार पूजन, पंचामृत अभिषेक स्नान, कुंकुमार्चन, नैवेद्य एवं आरती की जाएगी। साथ ही मुख्य देवता के दाईं ओर नवग्रहों की स्थापना एवं पूजा की जाएगी।
Number-3

लक्ष्मी-कुबेर पूजन एवं मंत्र जाप

माँ लक्ष्मी एवं भगवान कुबेर का पूजन कर 1,25,000 लक्ष्मी मंत्र एवं 1,25,000 कुबेर मंत्रों का जाप किया जाएगा।
Number-4

108 कमल पुष्प अर्पण एवं हवन

108 कमल पुष्प अर्पित किए जाएँगे। इसके बाद अग्नि देवता का आवाहन एवं स्थापना कर मंत्रों के साथ हवन में आहुतियाँ अर्पित की जाएँगी।
Number-5

पूर्णाहुति एवं पूजा समापन

हवन की पूर्णाहुति के साथ पूजा का समापन किया जाएगा।

श्री गजलक्ष्मी मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश

श्री गजलक्ष्मी मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
माँ गजलक्ष्मी को राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी के रूप में क्यों पूजा जाता है?

प्रसिद्ध श्री गज महालक्ष्मी माताजी मंदिर माँ गजलक्ष्मी की पूजा से जुड़ा है। माँ गजलक्ष्मी, माँ लक्ष्मी का एक दिव्य स्वरूप हैं, जो धन, राजसी समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, राजा विक्रमादित्य अपने राज्य की समृद्धि के लिए माँ गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानकर उनकी पूजा करते थे और उनका आशीर्वाद माँगते थे। इस मंदिर में माँ लक्ष्मी की एक खास प्रतिमा भी है, जिसमें वे भगवान इंद्र के दिव्य हाथी ऐरावत पर विराजमान दिखाई देती हैं।

धन और समृद्धि के लिए गजलक्ष्मी मंदिर का क्या महत्व है?

माँ गजलक्ष्मी को धन, आर्थिक खुशहाली और समृद्धि बनाए रखने से जुड़ा माना जाता है। उनके स्वरूप में दिखाए गए हाथी राजसी वैभव, शुभता और प्रचुरता के प्रतीक हैं। उज्जैन के इस मंदिर में भक्त धन, व्यापार में वृद्धि,...

पूजा पैकेज में क्या-क्या शामिल है?

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विद्वान पुरोहितों द्वारा भक्त के नाम-गोत्र का उच्चारण किया जाएगा।

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घर से पूजा में भाग लेने के लिए पंडित जी मंत्र और विधियां बताएंगे।

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पूरी पूजा का वीडियो आपको WhatsApp पर शेयर किया जाएगा।

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तीर्थ स्थल का प्रसाद और आशीर्वाद बॉक्स घर बैठे पाने की सुविधा।

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आप अपने नाम से वस्त्र दान, अन्न दान, दीप दान और गौ सेवा भी करवा सकते हैं

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भक्तों का अनुभव

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Ashit Shukla

Ashit Shukla

15 October, 2026

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Koti koti dhanyawad aapko, mere pitro ka tarpan karne ke liye. Yah ek bahut hi uttam kary hai ki jo log svym nahi kar sakte unke liye aap ne ye vyavastha bana di aur bahut hi uttam vidhi dwara poorn kiya


अनीता अरुनिता

अनीता अरुनिता

14 October, 2026

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बहुत ही खुशी हुई आपके माध्यम मेंसे कई गयी पुजा मुझे आनंदित किया आपकी पूरी टीम को सादर प्रणाम


Ravinder Kaur

Ravinder Kaur

14 October, 2026

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सभी प्रोग्राम सही समय पर पूर्ण रूप से संपन्न किये गए मुझे ग्राहक सहायता की जरूरत महसूस नहीं हुई धन्यवाद जी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

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