नक्षत्रों की वही चाल और कान्हा के अवतरण की वही ऊर्जा! इस मासिक जन्माष्टमी, ब्रज की जागृत धरा पर अपनी आराधना अर्पित करें और अपने प्रारब्ध के कठिन से कठिन लेख को प्रभु की एक मंद मुस्कान से बदल दें।
शास्त्रों में वर्णित है कि जिस तिथि पर श्रीकृष्ण का अवतार हुआ, वह ऊर्जा हर माह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में लौटती है। यह केवल एक दिन नहीं, बल्कि नंदलाला के साथ अपना रिश्ता गहरा करने का एक पवित्र अवसर है।
इसी पावन तिथि पर नंद बाबा ने नन्हे कान्हा के हाथों में गौ सेवा की बागडोर सौंपी थी। जब भगवान स्वयं 'गोपाल' बने, तो उन्होंने संदेश दिया कि जो गौ की सेवा करता है, श्रीकृष्ण उसकी सेवा स्वयं स्वीकार करते हैं।
दो धाम, एक दिव्य संकल्प
1️⃣ श्री मदन मोहन मंदिर: यदि आप इस धाम की दहलीज पर चढ़ावा अर्पित करते हैं, तो आप केवल एक परंपरा नहीं निभाते, बल्कि उस चैतन्य भक्ति से जुड़ते हैं जिसने युगों से भक्तों का उद्धार किया है।
3️⃣ श्री धाम गौशाला: भगवान कृष्ण के नामों में से एक 'गोपाल' है, जिसका अर्थ है गायों की रक्षा करने वाला। जिस शाला में सवायुम कान्हा ने गौ सेवा की, वहाँ सेवा करने से 33 कोटि देवी-देवताओं की अनंत कृपा प्राप्त होती है।







"हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।"
"हम स्वयं को चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो और वह संस्था प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत न हो। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट केवल तभी लागू होती है, जब दान प्राप्त करने वाली NGO के पास वैध 80G प्रमाणपत्र हो और उसने उसी के अनुरूप रसीद जारी की हो। हम किसी भी कर लाभ की गारंटी नहीं देते, जब तक कि उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित न किया गया हो। हमारे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, आप यह स्वीकार करते हैं कि आपका दान स्वैच्छिक है और आप स्वयं अपने दान से जुड़े कानूनी, कर एवं वित्तीय प्रभावों की पुष्टि करने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं।"
चढ़ावा बुकिंग के बाद आपको व्हाट्सऐप के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप में "चढ़ावा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपने चढ़ावे की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
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