ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी
ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी

ज्येष्ठ त्रि-पर्व महासेवा - अंतिम बड़ा मंगल | निर्जला एकादशी | शनि त्रयोदशी

🪔✨ ज्येष्ठ 2026 - 5 दिनों में 3 महापर्व। यह संयोग वर्षों में एक बार आता है! 23 जून को अंतिम बड़ा मंगल। 25 जून को निर्जला एकादशी। 27 जून को शनि त्रयोदशी। शास्त्र कहते हैं - ज्येष्ठ में की गई सेवा का फल सौगुना होता है, क्योंकि इस माह देना सबसे कठिन है, और इसीलिए सबसे पवित्र भी।
🙏 अंतिम बड़ा मंगल (23 जून) - (नया हनुमान मंदिर, अलीगंज, लखनऊ) - 5,000+ महाभंडारा
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं - सामान्यतः केवल 4 या 5 होते हैं। इस दुर्लभ वर्ष का अंतिम और सर्वाधिक फलदायी बड़ा मंगल 23 जून को है। यह वही पावन धाम है जहाँ आज से 400 वर्ष पूर्व माता सीता के वनवास काल में हनुमान जी ने रात्रि भर जागकर उनकी रक्षा की थी।ज्येष्ठ के प्रत्येक मंगल को महाभंडारे की परंपरा - जो आज 400 वर्ष बाद भी अटूट है। इस अंतिम बड़े मंगल पर 5,000 से अधिक लोगों के महाभंडारे में आपके नाम से सहभागिता - यह हनुमान जी के चरणों में प्रत्यक्ष सेवा है।
🌊 निर्जला एकादशी (25 जून) - धर्मारण्य वेदी, गया - जल एवं ऋतुफल सेवा
निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है। मार्कंडेय पुराण में स्पष्ट है - इस दिन जल और फल का सेवा करने वाले को भगवान विष्णु 24 एकादशियों का पुण्य प्रदान करते हैं। धर्मारण्य वेदी - वह भूमि जहाँ स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत के पश्चात यज्ञ किया था - इस पवित्र क्षेत्र में ज्येष्ठ की जलती दोपहरी में जल, खरबूजा और आम की सेवा पितृ दोष मुक्ति और मोक्ष-मार्ग का सर्वोत्तम द्वार है।
🪐 शनि त्रयोदशी (27 जून) - श्री नवग्रह शनि मंदिर, उज्जैन - काली सामान सेवा
27 जून को जब त्रयोदशी शनिवार को पड़ रही है - शनि प्रदोष के इस महायोग पर - उज्जैन के श्री नवग्रह शनि मंदिर में, जहाँ स्वयं विक्रमादित्य ने पूजा की थी, आपके नाम से यह दान-सेवा साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष के निवारण का सबसे प्रभावी उपाय है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे तीनों धामों में सेवा:
एक ही सप्ताह में लखनऊ, गया और उज्जैन - तीनों तीर्थों पर जाकर सेवा करना किसी भी भक्त के लिए संभव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे आपके नाम से तीनों पावन धामों में सेवा करवा सकते हैं। प्रत्येक मंदिर से सेवा का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 ज्येष्ठ का यह पाँच दिनों का त्रि-पर्व सप्ताह प्रतिवर्ष नहीं आता। भोजन दें, जल दें, छाया दें - और हनुमान जी, भगवान विष्णु तथा शनिदेव की एकसाथ कृपा प्राप्त करें।
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