बिना शिव के सर्पशांति संभव नहीं है - ऐसे में सावन सोमवार एवं नाग पंचमी सिद्ध महा-मुहूर्त में 2 शिव मंदिर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, पातालेश्वर एवं 2 नाग देवताओं के जागृत स्थान नाग वासुकि, तक्षकेश्वर नाथ में अपने नाम से अर्पण करें!
सर्पदोष कोई साधारण ग्रह-दोष नहीं है, यह शिव के दंड-अधिकारियों (राहु-केतु) का कार्मिक दंड है।इसे शांत करने के लिए केवल नाग आराधना नहीं, केवल शिव-आराधना नहीं काफ़ी नहीं है,शिव और नाग-राजों की संयुक्त आराधना और वह भी उन विशेष धामों में जहाँ इसकी शक्ति सबसे अधिक है।
स्कन्द पुराण और रुद्रयामल तंत्र की घोषणा:"नाग दोष के सम्पूर्ण निवारण के लिए शिव-नाग की संयुक्त आराधना ही एकमात्र पूर्ण और प्रामाणिक उपाय है।"और उसमें भी अभिषेक सबसे श्रेष्ठ उपाय है! शास्त्रों में अभिषेक को "कर्म-शोधन" का सर्वश्रेष्ठ माध्यम कहा गया है। जब शिवलिंग पर जल की धारा डाली जाती है, वह जल केवल पत्थर को नहीं धोता वह भक्त के कर्म-खाते को शुद्ध करता है।
ऐसे इस दोष निवारण के लिए सावन सोमवार (शिव के प्रिय माह में शिवजी का प्रिय दिन) और नाग पंचमी जब नागलोक में उत्सव होता है, नागों की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, तब नागों में श्रेष्ठ नाग वासुकि एवं सर्पराज तक्षक की एकसाथ आराधना करें - दोनों के जागृत धामों पर अपने नाम से अर्पण करें।
शिव के साथ ही क्यों?
राहु-केतु = काल (शिव) के दंड-अधिकारी।जब किसी की कुंडली में सभी ग्रह राहु-केतु के बीच फँस जाते हैं, यह वस्तुतः शिव के उस न्याय-तंत्र का प्रभाव है, जो पूर्वजन्म के अपूर्ण कर्मों का लेखा-जोखा करता है। अब विचार करें - यदि दंड किसी के अधिकारियों ने दिया हो, तो उसे कौन क्षमा कर सकता है? केवल वही जो उन अधिकारियों का स्वामी है और वह स्वामी हैं महादेव शिव।
🛕इन्हीं 4 मंदिरों में ही क्यों?
🐍 1. श्री नाग वासुकी मंदिर - नागों में श्रेष्ठ नाग वासुकि का स्थान।
🔱 2. श्री पाताळेश्वर- इनकी सुरक्षा सिर्फ़ पृथ्वी तक सीमित न रहकर पाताललोक तक है।
🐍 3. श्री तक्षकेश्वर नाथ, प्रयागराज - 9 ग्रह, 12 राशि, 28 नक्षत्रों के स्वामी का विश्व का एकमात्र तीर्थ
🔱 4. श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक - त्रिदेव का धाम, काल सर्प दोष शांति का एकमात्र जन्मस्थान
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प्रयागराज, ओंकारेश्वर और नासिक तीन अलग-अलग राज्यों के 4 मंदिरों में एक ही दिन जाना असंभव है।
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