सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा
सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा

सावन ग्रहण पूर्णिमा चन्द्र शांति 21 हवन आहुति एवं चढ़ावा

28 अगस्त को सावन माह के अंतिम दिन सावन पूर्णिमा पर लग रहा है वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण - जैसे जैसे आकाश में राहु चंद्रमा को ग्रसित करेगा-वैसे वैसे कुंडली में पीड़ित, नीच, या अस्त चंद्रमा से उत्पन्न बाधाएँ जागृत होंगी - ऐसे में सोमेश्वर महादेव - जहां चन्द्रदेव की मूल ऊर्जा है वहाँ होने वाले सर्वशक्तिशाली चन्द्र दोष शांति महा हवन में 21 आहुति दें - ग्रहण काल में सुरक्षा पाएं।
🤔 ग्रहण काल में हवन क्यों - शास्त्र क्या कहते हैं?
शास्त्रीय वचन है: "ग्रहणे हवन पुण्यं च सहस्रगुणमुच्यते।" - ग्रहण काल में किया गया हवन और संकल्प सामान्य दिनों से हजारों गुना अधिक फलदायी होता है। यद्यपि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है और सूतक-काल मान्य नहीं है, तथापि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसका सूक्ष्म ज्योतिषीय प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर अवश्य पड़ता है। यही वह दिन है जब चंद्र-सम्बन्धी दोषों का निवारण सर्वाधिक प्रभावशाली होता है और यही वह स्थान है जहाँ यह निवारण होना चाहिए।
🔥 21 हवन आहुति - अग्नि से सीधा संवाद:
हवन में अग्नि केवल अनुष्ठान नहीं — वह देवताओं का मुख है। "अग्निर्मुखं देवानाम्" अग्नि में जो भी अर्पित होता है, वह तत्काल देवता तक पहुँचता है। 21 आहुतियाँ तांत्रिक परम्परा में पूर्णता का प्रतीक हैं, 3 (त्रिदेव) × 7 (सप्त-सोम, चंद्रमा की 7 किरणें) = 21। जब तक 21 आहुतियाँ सम्पूर्ण न हों, हवन का फल अधूरा माना जाता है। सावन के पवित्र वातावरण में, ग्रहण-पूर्णिमा के सिद्ध मुहूर्त में, चंद्रदेव की स्वयं-स्थापित तपोभूमि पर 21 आहुतियों के साथ हवन = आपकी चंद्र पीड़ा का जड़ से दहन करने का सामर्थ्य रखता है।
🛕 श्री सोमेश्वर महादेव - चंद्र शांति का एकमात्र स्वयंसिद्ध तीर्थ:
पद्म पुराण और शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार प्रजापति दक्ष के श्राप से जब चंद्रमा की 16 कलाएं उससे क्षीण हो गई तब उन्होंने महादेव की घोर तपस्या की और वर्षों बाद श्रापमुक्ति का वरदान पाया। दोषमुक्त होने के बाद ही चन्द्र देव ने अपनी तपोभूमि पर इस सुंदर सोमेश्वर मंदिर का निर्माण किया जो आप भी चंद्र दोषों से शांति हेतु संपूर्ण धरती पर सर्वोच्च स्थान है।जिस तीर्थ पर चंद्रदेव ने स्वयं अपनी पीड़ा लेकर शरण ली थी। उसी तीर्थ पर, ग्रहण-पूर्णिमा की तिथि पर, आपके लिए चंद्र शांति हवन यह संयोग आकस्मिक नहीं, यह शास्त्र-सम्मत है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे सोमेश्वर महादेव पर हवन:
प्रयागराज के श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर जाकर सावन ग्रहण पूर्णिमा पर स्वयं हवन करवाना हर व्यक्ति के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से इस पावन तीर्थ पर चंद्र शांति महा हवन एवं चढ़ावा करवा सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से, 21 आहुतियों के साथ, आपका संकल्प लेकर हवन सम्पन्न कराएंगे।
🙏साल के अंतिम चन्द्र ग्रहण पर श्री सोमेश्वर महादेव चंद्र शांति महा हवन में सहभागी बनें - 21 आहुतियों के साथ - चंद्र दोष, मानसिक अशांति, पितृ दोष से स्थायी मुक्ति की ओर पहला कदम उठाएं। अभी बुक करें।
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