पितृ पक्ष एकादशी मोक्ष नगरी हरिद्वार पितृ शांति सेवा
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पितृ पक्ष एकादशी मोक्ष नगरी हरिद्वार पितृ शांति सेवा

🔱✨वर्ष की एकमात्र एकादशी श्राद्ध महातिथि पर हरिद्वार में संपूर्ण पितृ शांति सेवा! हरि के सर्वोप्रिय दिन हरि के द्वार हरिद्वार में सेवा! एकादशी श्राद्ध तक पितृ पक्ष की 10 महातीथियाँ बीत चुकी है, लेकिन यह वह तिथि है जो साल में सिर्फ़ एक बार आती है - जब पितृपक्ष सबसे बड़ा पितृ पर्व है उसमें भी तिथियों में सबसे श्रेष्ठ एकादशी पर आपके पितरों हेतु मुक्ति द्वार खुलेंगे - जो स्वयं श्री हरि अपने हाथों से खोलेंगे और आपके पूर्वजों को अपने वैकुण्ठ में स्थान देगें।
सत्ययुग में राजा इंद्रसेन अपने वैभवशाली राज्य में सुखपूर्वक शासन करते थे। एक दिन नारद मुनि उनके दरबार में उपस्थित हुए और एक ऐसा समाचार लाए जिसने राजा को भीतर तक झकझोर दिया - "महाराज, आपके स्वर्गवासी पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। वे आपसे सहायता माँग रहे हैं।" राजा व्याकुल हो गए अपने पिता को कष्ट से मुक्त करने के लिए क्या करें?
तब नारद मुनि ने उत्तर दिया "राजन्, पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी करें, भगवान विष्णु की आराधना करो, और उस पुण्य को पिता के नाम संकल्प से अर्पित करो।" राजा इंद्रसेन ने पूर्ण श्रद्धा से यह किया और ब्रह्म वैवर्त पुराण का वचन है, "उसी क्षण यमलोक में पिता की बेड़ियाँ टूट गईं, और उनकी आत्मा भगवान विष्णु के वैकुंठ को प्राप्त हुई।"
🛕 हरिद्वार 'हरि-द्वार' - मोक्ष का प्रवेश-द्वार:
हरिद्वार की धरती पर किया गया प्रत्येक पितृ-कर्म, प्रत्येक तर्पण, प्रत्येक दीपदान इस नगरी की अपनी मोक्ष-शक्ति से पोषित होता है। 'हरि-द्वार' = भगवान विष्णु का प्रवेश-द्वार - वह पवित्र भूमि जहाँ माँ गंगा हिमालय की ऊँचाइयों से उतरकर पहली बार पृथ्वी को स्पर्श करती हैं। भागीरथ ने जब राजा सगर के साठ हजार पुत्रों की आत्माओं की मुक्ति के लिए गंगा को स्वर्ग से उतारा - तो सबसे पहले गंगा ने हरिद्वार में ही पृथ्वी को स्पर्श किया। इसीलिए हरिद्वार पितृ-सेवा का उद्गम-स्थान है - यह श्राद्ध-परम्परा का जन्मस्थल कहा जाता है।
🙏पितरों की पीड़ा और आपके परिवार के कष्टों का एकमात्र समाधान - मोक्ष नगरी हरिद्वार में इंदिरा एकादशी के इस दुर्लभ पितृ-मुक्ति मुहूर्त पर संपूर्ण पितृ शांति महाकार्य करें - अभी बुक करें!
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