💰धनतेरस - पाँच दिवसीय दीपोत्सव महापर्व का पहला दिन - जब आप सोना, चाँदी, चल-अचल संपत्ति के ज़रिए माँ लक्ष्मी को अपने घर लाने का प्रयास करते हैं, क्योंकि शास्त्र कहते हैं यह साल का एकमात्र दिन है जब माँ लक्ष्मी आपकी चौखट पर आने के बाद दोबारा कभी लौट कर वापस नहीं जाती हैं। लेकिन ऐसा तभी संभव है - जब माँ आपके ऊपर प्रसन्न हो और वह स्वयं आपके द्वार आना चाहे! माँ को प्रसन्न करने के लिए उनके दो जागृत धामों पर अर्पण कर - उन्हें अपने घर आने के लिए आमंत्रित करें।
🌟2026 का यह धनतेरस कोई साधारण धनतेरस नहीं है!
💵इस बार धनतेरस - माँ लक्ष्मी को समर्पित दिन माँ लक्ष्मी के अपने ही वार शुक्रवार को पड़ रहा है, शुक्रवार -धन-वैभव-सौभाग्य के स्वामी शुक्र ग्रह को भी समर्पित है, जिसे साक्षात माँ लक्ष्मी नियंत्रित करती हैं। ऐसे में इस धनतेरस माँ और भी अधिक वरदायक एवं प्रत्यक्ष आशीर्वाद देने के स्वरूप में जागृत हैं।
महालक्ष्मी के 2 जागृत धाम - जहां वो साक्षात निवास करती हैं!
🛕श्री महालक्ष्मी अम्बाबाई शक्तिपीठ - कोल्हापुर
✨यहीं माँ सती के त्रिनेत्र गिरे थे, वैकुण्ठ से रूठी महालक्ष्मी जब पृथ्वी पर आयी तो उन्होंने इसी धाम को अपना निवास स्थान चुना था। यहाँ माँ महालक्ष्मी की स्वयंभू, श्यामवर्णी, चतुर्भुज प्रतिमा पश्चिम मुखी स्वरूप में विराजित हैं, जो स्थिर एवं सबसे अधिक वरदायक है।
🛕श्री गजलक्ष्मी, उज्जैन - राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी
🔱उज्जैन में लगभग 2,000 वर्ष पुराना, स्कंद पुराण में उल्लिखित श्री गजलक्ष्मी मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर जहाँ माँ लक्ष्मी गज (हाथी) पर विराजित हैं। यह अष्टलक्ष्मी का 'गजलक्ष्मी' स्वरूप है राजसी समृद्धि, धन के अखंड प्रवाह और दिव्य वैभव की प्रतीक। यही धन-आगमन का सिद्ध तीर्थ है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 2 महालक्ष्मी मंदिरों पर चढ़ावा:
🙏एक ही दिन कोल्हापुर (महाराष्ट्र) और उज्जैन (मध्य प्रदेश) दोनों महाशक्तिपीठों पर जाकर स्वयं आराधना करना किसी भी भक्त के लिए असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से दोनों लक्ष्मी मंदिरों में विशेष चढ़ावा एवं आराधना करवा सकते हैं। दोनों मंदिरों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से संकल्प लेकर चढ़ावा एवं आराधना सम्पन्न कराएंगे। जिसका वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
💎इस धनतेरस - धन के आगमन हेतु संपूर्ण द्वार खोलें - महालक्ष्मी शक्तिपीठ और गजलक्ष्मी दोनों का संयुक्त आशीर्वाद एक ही दिन पाएँ।