नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक
नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक
नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक
नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक
नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक
नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक

नागुला चविथी 3 नाग मंदिर दूध महा अभिषेक

🔱नागुला चविथि - जब नाग देवता जागृत होते हैं और दुग्ध-अभिषेक से प्रसन्न होकर वरदान देते हैं! इस दुर्लभ महा-मुहूर्त पर नागों में श्रेष्ठ 3 नाग नाग वासुकि, तक्षकेश्वर एवं कर्कोटक नाग का दूध से महाभिषेक करें - 3 नागों की सुरक्षा एकसाथ पाएं!
वेद और पुराणों में नाग देवताओं को पृथ्वी के संरक्षक, जल-तत्व के स्वामी और कुल-वंश के रक्षक कहा गया है। भगवान शिव वासुकी को कंठ में धारण करते हैं - इसीलिए शिव को 'नागभूषण' कहा जाता है। भगवान विष्णु आदिशेष पर विराजते हैं, इसीलिए उन्हें 'शेषशायी' कहा जाता है। जिस परमात्मा के आभूषण और शयन-शैया नाग हैं, उन नाग देवताओं की प्रसन्नता - स्वयं शिव और विष्णु की प्रसन्नता।
🐍 दुग्ध अभिषेक क्यों और समुद्र मंथन से क्या सम्बन्ध?
समुद्र-मंथन में वासुकी नाग को मंदरांचल पर्वत की रस्सी बनाया गया। देव और असुर एक हज़ार वर्षों तक खींचते रहे। पर्वत का घर्षण, अग्नि की लपटें वासुकी का शरीर जल रहा था। तब देव-माताओं ने उनके जलते शरीर पर शीतल, पवित्र दूधडाला। दुग्ध-स्पर्श ने उनकी पीड़ा हरी और उन्होंने वरदान दिया "जो मुझे दूध से अभिषिक्त करेगा, उसके जीवन की समस्त नाग-पीड़ा, सर्पदोष और राहु-केतु का ताप मैं हर लूंगा।" इसीलिए नागुला चविथि पर दुग्ध अभिषेक सर्वाधिक प्रिय और सर्वाधिक प्रभावी उपाय है।
🤔'त्रि-नाग कवच' क्या है तीन मंदिर क्यों?
तीर्थराज प्रयागराज में तीन महानागों के तीन जागृत तीर्थ हैं और तीनों अलग-अलग प्रकार की नाग-पीड़ा से मुक्ति देते हैं:
🐍वासुकी समुद्र-मंथन के महानाग, शिव के कंठ-आभूषण। यह विश्व के केवल दो मंदिरों में से एक है जहाँ कालसर्प दोष का विधिवत निवारण होता है (दूसरा नासिक में)। यहाँ दुग्ध अभिषेक कालसर्प दोष की जड़ पर प्रहार।
🐍तक्षक सर्पों के सर्वोच्च राजा। पद्म पुराण के प्रयाग माहात्म्य में 5000 वर्ष पुराना यह मंदिर उल्लिखित है। वचन है जो इस मंदिर में दर्शन करे, उसे और उसकी सम्पूर्ण वंश-परम्परा को कभी सर्पदंश नहीं होता। यहाँ दुग्ध अभिषेक - पीढ़ी-दर-पीढ़ी की रक्षा।
🐍कर्कोटक स्कंद पुराण में वर्णित। उनका मंत्र है 'विष-शस्त्र-अग्नि संतापं हत्वा शांतिं करोतु मे' विष, शस्त्र और अग्नि के ताप को नष्ट कर मुझे शांति दो। यहाँ दुग्ध अभिषेक = सर्पभय, विष-दोष और राहु-केतु जनित समस्त कष्टों का नाश।
नागुला चविथि पर तीर्थराज प्रयागराज के तीन महानागों को दुग्ध-अभिषेक अर्पित करें और त्रि-नाग कवच प्राप्त करें। कालसर्प दोष, सर्पदोष, राहु-केतु पीड़ा - एक दिन में तीन शक्तियों से समाधान। यह अवसर वर्ष में केवल एक बार आता है - अभी बुक करें!
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