🌒सूर्य ग्रहण के समय उग्र राहु अपने शत्रु सूर्य को ग्रसित करने का प्रयास करता है, यह वो समय है जब राहु सबसे सक्रिय, सबसे जाग्रत, सबसे शक्तिशाली होता है। इस मुश्किल की घड़ी में जो व्यक्ति पहले से राहु दोष, काल सर्प योग या राहु महादशा से पीड़ित है उस पर राहु का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है, जिसकी शांति केवल राहु मूल स्थान पर ही संभव हैं।
🐍राहु और सूर्य की पुरानी शत्रुता - जो ग्रहण काल में अपने चरम पर होती है:
वैदिक ज्योतिष में स्पष्ट है, सूर्य ग्रहण राहु के कारण लगता है। समुद्र मंथन के पश्चात छल से अमृत पीने के बाद सूर्य-चंद्र ने जब राहु का भेद खोला और विष्णु ने उसका मस्तक काटा तब से राहु का प्रतिशोध अभी तक अटल है।
राहु का केवल सिर है पूरा शरीर नहीं है ऐसे में जब जब उसे मौक़ा मिलता है - वो सूर्यदेव को निगलने की कोशिश करता है - यही ग्रहण है। इस समय सूर्यदेव संकट में होते है और संपूर्ण सृष्टि पर नकारात्मकता अपने चरम पर होती है- पुराने सभी दोष, कर्म और ऋण जागृत होते हैं।
🛕राहु मूलस्थान पर चढ़ावा क्यों?
जब श्री हरि ने राहु का सिर धर से अलग किया तब पृथ्वी पर राहु का सिर यहीं आकर गिरा। जिसके बाद राहु ने यहीं महादेव की वर्षों घोर तपस्या की और उसे छाया ग्रह होने का वरदान मिला। यही वह जगह है जहां से राहु की मूल शक्तियाँ जुड़ी है।
☀️सूर्य ग्रहण काल में राहु का आपके ऊपर प्रभाव:
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जीवन-शक्ति का केंद्र माना गया है। जब राहु सूर्य को ग्रास करता है, तो आत्मा, करियर और प्रतिष्ठा राहु की छाया में आ जाते हैं। मानसिक भ्रम से गलत निर्णय लेना, निवेश में अचानक धन-हानि, प्रतिष्ठा पर संकट और स्वास्थ्य सम्बन्धी पुरानी बीमारियों का उभरना इसके मुख्य लक्षण हैं। यह ग्रहण आश्लेषा नक्षत्र में है, जो अवचेतन मन की पुरानी चिंताओं और भय को जागृत करता है। ऐसे में राहु के उग्र प्रभाव और क्रूर व्यवहार को शांत करने के लिए उसके मूल स्थान से श्रेष्ठ स्थान कोई भी नहीं है।
🙏सावन अमावस्या पर पूर्ण सूर्य ग्रहण राहु की सर्वाधिक सक्रिय शक्ति का काल। भारत के एकमात्र राहु मूलस्थान श्री पैठाणी मंदिर में इस अत्यंत दुर्लभ महामुहूर्त पर राहु दोष निवारण चढ़ावा सेवा में सहभागी बनें!