🔱सावन के पहले सोमवार पर सम्पूर्ण सावन का महा संकल्प लें - सावन की उत्पत्ति से लेकर शिव तक पहुँचने का मार्ग खोजे! 4 शिवलिंग पर महा रुद्राभिषेक करें।
सावन का पहला सोमवार - यह एक ऐसा काल है जो शिव के बारे में 4 भिन्न और गहरे सत्यों को उजागर करता है।और आज पहले सावन सोमवार पर यह चारों सत्य 4 शिवलिंगों के रूप में आपके सामने हैं।
🛕नीलकंठेश्वर महादेव, काशी - सावन क्यों मनाया जाता है?
संपूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु समुद्र मंथन से निकले विष को जब शिव जी ने अपने कंठ में धारण किया तब उनका पूरा कंठ नीला पड़ गया और वह नीलकंठ कहलाए ।विष की तीव्र ज्वाला को शांत करने हेतु देवताओं, ऋषियों और माता पार्वती ने उनके कंठ पर निरंतर जल अर्पित किया। इसी दिव्य घटना से सावन में जलाभिषेक की परंपरा का आरंभ माना जाता है।
🛕सोमेश्वर महादेव, प्रयागराज - भगवान शिव ग्रह-दोष कैसे दूर करते हैं?
राजा दक्ष के श्राप से चंद्रदेव क्षय रोग से पीड़ित होकर अपना तेज खोने लगे। मुक्ति की खोज में वे प्रयागराज आए और कठोर तप एवं शिव आराधना की। भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर पुनः उनका तेज लौटाया। कृतज्ञता स्वरूप चंद्रदेव ने यहाँ शिव मंदिर की स्थापना की, जो सोमेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसलिए यह स्थान ग्रह-दोष, चंद्र-दोष और जीवन के कष्टों के निवारण का पावन तीर्थ माना जाता है।
🛕पशुपतिनाथ, हरिद्वार - भगवान शिव किसकी रक्षा करते हैं?
'पशुपति' अर्थात समस्त प्राणियों के स्वामी। इस स्वरूप में भगवान शिव केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जंतु और संपूर्ण सृष्टि के करुणामय रक्षक हैं। चारधाम यात्रा के प्रवेशद्वार हरिद्वार में स्थित यह मंदिर सावन के दौरान विशेष महत्व रखता है। लाखों कांवड़िये गंगाजल लेकर अपने घर लौटने से पहले पशुपतिनाथ महादेव के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
🛕पातालेश्वर महादेव, ओंकारेश्वर - भगवान शिव की रक्षा कहाँ तक पहुँचती है?
'पाताल' अर्थात अधोलोक। ओंकारेश्वर परिसर में स्थित पातालेश्वर महादेव का स्वयंभू शिवलिंग आंशिक रूप से धरती के भीतर स्थित है, जो इस सत्य का प्रतीक है कि भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं, बल्कि पाताल लोक, पितृलोक तथा समस्त अदृश्य लोकों तक व्याप्त है। उनकी कृपा और संरक्षण सभी लोकों में समान रूप से विद्यमान है।
🔴 पहला सावन सोमवार - इसी दिन क्यों?
शिव महापुराण का वचन: "सावन में की गई रुद्राभिषेक अन्य समय से 10,000 गुना अधिक पुण्य देती है।" स्कंद पुराण: "किसी भी माह में शिव की कृपा उतनी स्वतंत्र रूप से नहीं बहती जितनी सावन में। और पहला सोमवार = सर्वाधिक ऊर्जा लेकर आता है।
🙏सावन प्रथम सोमवार पर संपूर्ण सावन की शिव कृपा पाएँ - शिव चार शिवलिंगों के रुद्राभिषेक से शिवजी को संपूर्ण कृपा पाएं।