गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा
गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा
गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा
गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा
गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा
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गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा

गणेश चतुर्थी मनोकामना पूर्ति मध्याह्न काल 21 मोदक चढ़ावा

ब्रह्मा-विष्णु-महेश भी जिन्हें सर्वप्रथम नमन करते हैं - उनके जन्मोत्सव महापर्व पर अपने नाम संकल्प से उन्हें उनके सबसे प्रिय 21 मोदक का भोग लगाएं।
🛕 गणेश चतुर्थी क्यों है यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण जन्मोत्सव?
भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी वह पावन तिथि जिस दिन माता पार्वती ने अपनी काया के उबटन से श्री गणेश की रचना की, प्राण-प्रतिष्ठा की और उन्हें संसार को दिया। गणेश - प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता, सिद्धिदाता। ब्रह्मा-विष्णु-महेश से भी पहले जिन्हें नमन किया जाता है, उनका जन्मोत्सव है गणेश चतुर्थी। शास्त्रों का वचन है: "गणेशाग्रे पूजनीयः — यः पूजयेत् तत्र कार्यं सिद्ध्यति।" गणेश को पहले पूजने वाले के हर कार्य में सिद्धि होती है। गणेश चतुर्थी पर की गई पूजा और चढ़ावा सम्पूर्ण वर्ष के नए कार्यों, नए संकल्पों और नई मनोकामनाओं के लिए गणेश का आशीर्वाद-आवरण बनाता है।
🕛 मध्याह्न काल - मान्यतानुसार, गणेश का जन्म-क्षण क्यों है अद्वितीय?
शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है, गणेश जी का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था, दिन के पाँच भागों (प्रातःकाल, सङ्गव, मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल) में से तीसरा भाग जब सूर्य अपने शीर्ष पर होता है और ऊर्जा सर्वोच्च होती है। गणेश चतुर्थी का यह मध्याह्न काल वर्ष में केवल एक बार आता है, यह केवल एक मुहूर्त नहीं, यह गणेश का 'जन्म-क्षण' है। इस क्षण में किया गया 21 मोदक का चढ़ावा ठीक उस समय अर्पित होता है जब ब्रह्माण्ड ने पहली बार श्री गणेश को देखा था। इससे बड़ा कोई मुहूर्त, कोई अवसर नहीं है।
📖 21 मोदक - पद्म पुराण का वरदान और सांख्य-दर्शन का रहस्य:
पद्म पुराण की कथा है, जब ऋषि अत्रि-पत्नी अनुसूया माता ने बालक गणेश को दिव्य मोदक अर्पित किए, तो 21 मोदक खाने के बाद गणेश तृप्त हुए। उसी क्षण माता पार्वती ने यह दृश्य देखकर वरदान दिया: "जो मेरे पुत्र को 21 मोदक भक्तिपूर्वक अर्पित करेगा - उसकी मनोकामना वे अवश्य पूर्ण करेंगे।"
इसके अलावा सांख्य-दर्शन इसकी पुष्टि करता है - 5 ज्ञानेन्द्रियाँ + 5 कर्मेन्द्रियाँ + 5 प्राण + 5 महाभूत + 1 मन = 21। 21 मोदक = अपने अस्तित्व के सम्पूर्ण 21 आयामों का गणेश को समर्पण। जब समर्पण सम्पूर्ण होता है, तो गणेश उन्हीं 21 आयामों से जीवन के हर विघ्न को, हर बाधा को हटा देते हैं। अधूरी मनोकामना का एकमात्र कारण है, अधूरा समर्पण। 21 मोदक उस अधूरेपन को मिटाते हैं।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे गणेश चतुर्थी के मध्याह्न काल में 21 मोदक चढ़ावा:
गणेश जन्मोत्सव पर उज्जैन जाकर श्री बड़ा गणेश मंदिर में मध्याह्न काल में 21 मोदक का महाभोग स्वयं अर्पित करना सबके लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से यह पवित्र संकल्प करवा सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से गणेश जन्मोत्सव के मध्याह्न जन्म-काल में आपके नाम का संकल्प लेकर 21 मोदक का महाभोग अर्पित करेंगे। चढ़ावा अर्पण का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 गणेश जन्मोत्सव पर उनके अपने जन्म-काल में पद्म पुराण-प्रमाणित 21 मोदक चढ़ावा संकल्प में सहभागी बनें- मन की हर अधूरी मनोकामना गणेश के चरणों में अर्पित करें - अभी बुक करें!
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