पितृ पक्ष पंचमी कुरुक्षेत्र संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष पंचमी कुरुक्षेत्र संपूर्ण पितृ शांति सेवा
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पितृ पक्ष पंचमी कुरुक्षेत्र संपूर्ण पितृ शांति सेवा

पितृ पक्ष पंचमी कुरुक्षेत्र संपूर्ण पितृ शांति सेवा

`⚔️ धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र - जहाँ पितृ पक्ष की मूल कथा जन्मी, उसी भूमि पर पंचमी का पितृ-श्राद्ध।
` 🏛️कुरुक्षेत्र: धर्मक्षेत्र - जहाँ पितृ-श्राद्ध की परम्परा स्वयं महाभारत में जन्मी भगवद् गीता का प्रथम श्लोक है: "धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।" यह केवल युद्ध-भूमि नहीं - यह धर्म की भूमि है। श्री कृष्ण ने अपने विराट स्वरूप में अर्जुन को संपूर्ण जीवन का सार बताया- एक आत्मा की जन्म से पहले, जीवन के बाद एवं कर्मों की संपूर्ण यात्रा का व्याख्यान किया। इसके साथ ही महाभारत युद्ध के पश्चात् जब युधिष्ठिर ने लाखों वीरों का श्राद्ध इसी भूमि पर किया - तब 'सम्पूर्ण पितृ-शान्ति सेवा' की परम्परा यहीं से आरम्भ हुई। गरुड़ पुराण में उल्लेख है: "भीष्म तर्पण का कृत्य जिस स्थान पर हुआ था, उस स्थानपर श्राद्ध करने से मनुष्य पितृगणों को भवसागर से पार पा सकता है।" यहाँ श्राद्ध करना = उस महान परम्परा का अनुसरण जो महाभारत-काल से चली आ रही है। 🌸 पंचमी: वह तिथि जो असमय गए पितरों के लिए है:
` हर परिवार में कोई न कोई ऐसा जन होता है - जो युवा अवस्था में गया, जिसकी शादी न हुई, जो अपूर्ण जीवन लेकर गया हो ये सामान्य है, तीन से चार पीढ़ियों से ज़्यादा कोई नहीं जानता पीढ़ियों पहले आपके परिवार में क्या हुआ। ऐसे में पंचमी पर किया पितृकार्य उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों की शांति के लिए है।
मत्स्य पुराण में स्पष्ट कहा गया है - "इस पंचमी पर श्राद्ध न करने से ऐसे पितरों का पितृ दोष पीढ़ी-दर-पीढ़ी विवाह-विलम्ब, सन्तान-बाधा और परिवार में अशांति के रूप में प्रकट होता है।" निर्णय सिन्धु में भी ऐसे पितरों के लिए पंचमी श्राद्ध की विशेष अनुशंसा है।
🙏 सम्पूर्ण पितृ-शान्ति - क्योंकि कोई पितर अधूरा न रहे
इस सेवा में उसी कुरुक्षेत्र में जहाँ गीता का उद्घोष हुआ, जहाँ भीष्म का तर्पण हुआ, जहाँ युधिष्ठिर ने सम्पूर्ण युद्ध-वीरों का श्राद्ध किया आपके सभी पितरों के लिए विधि-विधान से सम्पूर्ण संपूर्ण पितृ शांति सेवा होगी। गरुड़ पुराण का वचन है: "पितृ कार्य करने वालों को पितर से वंश कल्याण, पितामह से धन-सम्पत्ति की वृद्धि और प्रपितामह से समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।" तृप्त पितर केवल शान्त नहीं होते - वे वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
🙏धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर ब्रह्म सरोवर और स्थाणेश्वर महादेव के आशीर्वाद से अपने पितरों को तृप्ति और मोक्ष का मार्ग दें। अभी बुक करें।`
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