सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण
सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण
सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण
सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण
सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण
सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण

सावन ग्रहण अमावस्या गया-त्रिवेणी संगम पितृ तर्पण

सावन अमावस्या एवं सूर्य ग्रहण दुर्लभ महायोग पर जब पितृ पृथ्वी के सबसे क़रीब होंगे तब संपूर्ण मोक्षभूमि गया एवं त्रिवेणी संगम पर अपने पितरों के नाम से तर्पण करें।
सावन (शिव-विष्णु का सर्वप्रिय मास), सावन अमावस्या (पितरों की सर्वश्रेष्ठ तिथि -जब वे धरती पर अपने वंशजों के सबसे निकट होते हैं), सूर्य ग्रहण (पितृ-देवता सूर्य का ग्रहण-काल पद्म पुराण कहता है: "सूर्य ग्रहण में पितरों के निमित्त किए गए तर्पण का फल दस लाख गुना होता है") -तीनों एकसाथ = सदियों में बना सर्वश्रेष्ठ महा मुहूर्त है।
सामान्य दिन के तर्पण का जो फल है, सावन अमावस्या पर उससे कोटि गुना। और सावन अमावस्या के तर्पण का जो फल है, सूर्य ग्रहण-काल में उससे दस लाख गुना।
🛕गया एवं त्रिवेणी संगम - जहाँ पितरों को मिलती है संपूर्ण तृप्ति:
गरुड़ पुराण कहता है: "गया में एक पिंडदान से 108 कुल और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है।" वायु पुराण में पितरों के लिए फल्गु नदी को गंगा से भी अधिक पावन कहा गया है "फल्गु के तट पर जिसका पाँव पड़ जाए, उसके पितरों को मोक्ष मिल जाता है।"
इसके अलावा गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम पर जहां अमृत कलश की बूँदें गिरी थी वहाँ अपने पितरों के नाम से तर्पण करने से 7 पीढ़ियों के पितरों को संपूर्ण अन्न-जल की तृप्ति मिलती है जिसकें बाद वो इस सांसारिक मोह से मुक्त हो मोक्ष की और प्रस्थान करते हैं।
🌿 पितृ दोष - वह अदृश्य बाधा जो पीढ़ियों को रोकती है:
जब पितरों की आत्माएँ तृप्त नहीं होतीं वे अपने वंशजों के जीवन में इन रूपों में प्रकट होती हैं: विवाह में देरी, संतान न होना, व्यापार में हानि, परिवार में कलह, स्वास्थ्य समस्याएँ, सपने में पितरों का रोते हुए दिखना, मानसिक अशांति, दुर्घटनाएँ।यह कोई अंधविश्वास नहीं, यह सनातन धर्म का कर्म-विज्ञान है जिसे गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण और अग्नि पुराण तीनों पुष्टि करते हैं। और इसका एकमात्र स्थायी समाधान है -गया-फल्गु एवं त्रिवेणी संगम में विधिवत् आपके पितरों के नाम से तर्पण।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 2 तीर्थों की पितृ महा तर्पण सेवा में सहभागी बनें:
गया धाम, बिहार की फल्गु नदी और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुँचकर, सावन सूर्य ग्रहण-अमावस्या के सिद्ध महामुहूर्त में तर्पण करवाना देश के हर कोने में बैठे भक्त के लिए संभव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस दिव्य सेवा में सहभागी बन सकते हैं। दोनों तीर्थों के पुरोहित जी आपके पितरों के नाम से से संकल्प लेकर, सम्पूर्ण विधि-विधान से तर्पण सम्पन्न करेंगे। सेवा का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏वर्षों में एक बार आने वाले इस दुर्लभ सावन सूर्य ग्रहण एवं सावन अमावस्या के महामुहूर्त को न चूकें! गया-त्रिवेणी संगम पर पितृ महा तर्पण में सहभागी बनें - 7 पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष, पितृ दोष से मुक्ति, और परिवार पर पितरों का अनंत आशीर्वाद। अभी बुक करें!
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