मातृ नवमी मातृ-पितृ ऋण मुक्ति मातृ गया सिद्धपुर महासेवा
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मातृ नवमी मातृ-पितृ ऋण मुक्ति मातृ गया सिद्धपुर महासेवा

शास्त्रों में तीन प्रकार के ऋण बताए गए हैं - देव ऋण, पितृ ऋण, और ऋषि ऋण। परंतु इन सबसे ऊपर और सबसे गहरा है मातृ ऋण। उनका ऋण जिन्होंने जिनसे आपका वजूद है - जिन्होंने 9 माह कोख में धारण किया, असह्य पीड़ा सहकर इस संसार में लाया, आपके रक्त से सींचा और सबकुछ त्यागकर हमारे सपने पूरे किए। वह ऋण जिसके बारे में शास्त्र भी कहते है - कि यह एकमात्र ऐसा ऋण है जिसे कोई नहीं चुका सकता। लेकिन सिद्धपुर आपके इस भार को कम कर सकता है - विश्व का एकमात्र मातृ तीर्थ!
मातृ ऋण चुकाना क्यों है ज़रूरी?
जब माँ, नानी, दादी या किसी दिवंगत महिला पूर्वज का विधिपूर्वक श्राद्ध-तर्पण नहीं होता - तो उनकी आत्मा तृप्त नहीं होती, और परिवार पर पितृ दोष और मातृ दोष का प्रकोप चढ़ता है। संतान बाधा, विवाह में अड़चनें, गृह-क्लेश, परिवार की स्त्रियों पर बार-बार संकट, व्यापार में हानि - ये सब मातृ ऋण और अतृप्त महिला पूर्वजों के संताप के ही रूप हैं।
📿मातृ नवमी - वर्ष की सर्वोत्तम मातृ श्राद्ध तिथि: पितृ पक्ष के 16 पावन दिनों में से नवमी तिथि विशेष रूप से महिला पूर्वजों को समर्पित है - इसे मातृ नवमी कहते हैं। इस दिन माँ, नानी, दादी, बहन, बहू और दिवंगत बेटी सहित समस्त महिला पूर्वजों का श्राद्ध-तर्पण करने का शास्त्रोक्त विधान है। जिनकी माँ की स्वर्गगमन तिथि अज्ञात है - वे भी मातृ नवमी पर श्राद्ध कर सकते हैं। शास्त्रीय वचन है, मातृ नवमी पर श्रद्धापूर्वक किया गया पिंड तर्पण परिवार को सुख, सौभाग्य, समृद्धि और कल्याण का आशीष दिलाता है।
🛕भारत का एकमात्र मातृ गया - बिंदु सरोवर, सिद्धपुर (गुजरात): ठीक जैसे गयाजी (बिहार) में पितरों का पिंड दान होता है - वैसे ही सम्पूर्ण भारत में केवल सिद्धपुर के बिन्दु सरोवर में माँ का पिंड दान होता है। यदि आप माँ, नानी, या दादी को मोक्ष दिलाना चाहते हैं, तो समस्त भारत में एकमात्र पवित्र स्थान बिन्दु सरोवर, सिद्धपुर है। यहाँ किया गया मातृ तर्पण और पिंड दान अन्यत्र किसी तीर्थ से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।
विष्णु के दिव्य अश्रुबिन्दुओं से जन्मा यह सरोवर: श्रीमद्भागवत पुराण के तृतीय स्कंध में वर्णित है - जब ऋषि कर्दम मुनि ने सरस्वती नदी के तट पर दस हजार दिव्य वर्षों तक तपस्या की, तब साक्षात् भगवान विष्णु प्रसन्न होकर प्रकट हुए। भक्त की अनन्य निष्काम भक्ति देखकर भगवान की आँखों से प्रेम-अश्रु बह निकले और वे पवित्र अश्रु-बिन्दु धरती पर गिरकर 'बिन्दु सरोवर' बन गए। इसीलिए इस सरोवर का जल साक्षात् विष्णु-प्रेम का स्वरूप है।
यही वह भूमि है, जहां श्री हरि विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी ने भी अपनी माता रेणुका का श्राद्ध कार्य किया और मातृ दोष से शांति पाएँ - इसी दिव्य भूमि भारत के एकमात्र मातृ गया बिन्दु सरोवर, सिद्धपुर में मातृ-पितृ ऋण मुक्ति महासेवा में अभी सहभागी बनें।
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