वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा
वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा

वरलक्ष्मी व्रत विशेष महालक्ष्मी तुलजापुर भवानी चढ़ावा

🌸⚔️ लगभग 3 वर्षों में एक बार — जब अधिक मास की कृष्ण पंचमी शुक्रवार को पड़े और दोनों दिव्य बहनें एक साथ पूजित हों!
एक पुरानी महाराष्ट्रीय लोक-परम्परा है — जब भी जीवन में केवल समृद्धि माँगी जाती है, वह आती है पर ठहरती नहीं। जब केवल शक्ति माँगी जाती है, वह मिलती है पर सुख नहीं रहता। सम्पूर्ण जीवन — स्थायी धन, अटूट साहस, शत्रुओं से सुरक्षा, परिवार में शांति, और आत्मिक संतोष — यह तब मिलता है जब दोनों दिव्य बहनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो। बड़ी बहन श्री अंबाबाई महालक्ष्मी — समृद्धि, अनुग्रह और मुक्ति की देवी। छोटी बहन माँ तुलजा भवानी — शक्ति, साहस और शत्रु-विनाश की देवी। और आज, इस दुर्लभ अधिक कृष्ण पंचमी पर, इन दोनों दिव्य बहनों के शक्तिपीठों पर एक साथ, एक ही मुहूर्त में, आपके नाम से चढ़ावा होगा।
🤔 यह अवसर इतना दुर्लभ क्यों है?
तीन शक्तियाँ आज एक साथ मिल रही हैं। पहली — अधिक मास (पुरुषोत्तम मास): लगभग 32.5 महीनों में एक बार आने वाला यह पवित्र अतिरिक्त मास, जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने 'पुरुषोत्तम मास' नाम दिया। इस मास में किया गया चढ़ावा और पूजन सामान्य दिनों से कई गुना अधिक पुण्य देता है — महालक्ष्मी जो भगवान विष्णु की संगिनी हैं, इस मास में विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं। दूसरी — कृष्ण पंचमी: पाँचवीं तिथि — देवी की उग्र और कल्याणकारी दोनों शक्तियों की जागृत तिथि। तीसरी — शुक्रवार: महालक्ष्मी का प्रिय दिन। शुक्र ग्रह धन, वैभव और सौंदर्य का स्वामी है। शुक्रवार को महालक्ष्मी का चढ़ावा — धन-लक्ष्मी के स्थायी आगमन का सर्वोत्तम उपाय। यह त्रि-संयोग — अधिक मास + कृष्ण पंचमी + शुक्रवार — वर्षों में एक बार बनता है।
🌸 बड़ी बहन — श्री अंबाबाई महालक्ष्मी, कोल्हापुर:
634 ईस्वी में चालुक्य राजा कर्णदेव द्वारा निर्मित यह मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है और भारत के 52 शक्तिपीठों में गणनीय है [1]। स्कन्द पुराण में इस क्षेत्र का वर्णन है। माँ अंबाबाई यहाँ केवल धन की देवी नहीं हैं — वे महिषासुर का वध करने वाली योद्धा भी हैं [2]। उनकी दुर्लभ रत्नमय प्रतिमा की दीवार पर स्वयं श्री यंत्र उत्कीर्ण है। वे बड़ी बहन हैं — समृद्धि, अनुग्रह और परम मुक्ति की दाता। महाराष्ट्र की लोक-परम्परा के अनुसार, छोटी बहन तुलजा भवानी अपनी बड़ी बहन महालक्ष्मी की अतिथि के रूप में कोल्हापुर में निवास करती हैं [6][7]।
⚔️ छोटी बहन — माँ तुलजा भवानी, तुलजापुर:
महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक — माँ तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी हैं [4]। यह वही देवी हैं जिनकी कृपा से शिवाजी महाराज ने अपना अदम्य साहस और विजयी जीवन प्राप्त किया — भवानी तलवार की किंवदंती उसी अटूट आस्था और दैवीय शक्ति का प्रतीक है [5]। माँ भवानी — पार्वती की वह शक्ति जो शत्रुओं को स्तम्भित करती है, भक्त के वंश की रक्षा करती है और जीवन में अजेय साहस का संचार करती है। जब बड़ी बहन समृद्धि देती हैं — छोटी बहन उसकी रक्षा करती हैं। दोनों का एक साथ आशीर्वाद — यही सम्पूर्ण जीवन-कवच है।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे दोनों शक्तिपीठों पर चढ़ावा:
कोल्हापुर और तुलजापुर — महाराष्ट्र के दो अलग-अलग जिलों में स्थित — दोनों शक्तिपीठों पर एक ही दिन, एक ही मुहूर्त में जाकर चढ़ावा करवाना किसी भी भक्त के लिए असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे दोनों दिव्य बहनों के मंदिरों में अपने नाम-गोत्र से चढ़ावा करवा सकते हैं। प्रत्येक मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से, आपके नाम-गोत्र का संकल्प लेकर, चढ़ावा सम्पन्न कराएंगे। दोनों शक्तिपीठों से चढ़ावे का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 अधिक मास की यह दुर्लभ कृष्ण पंचमी वर्षों में एक बार आती है। शुक्रवार पर महालक्ष्मी का आशीर्वाद और भवानी माँ की शक्ति — दोनों एक साथ। जो समृद्धि बिना शक्ति के अधूरी है और जो शक्ति बिना समृद्धि के थका देती है — वह आज पूर्ण होती है। अभी बुक करें — दोनों दिव्य बहनों के शक्तिपीठों पर चढ़ावे में सहभागी बनें और जीवन में समृद्धि-शक्ति का सम्पूर्ण कवच प्राप्त करें।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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