महा नवरात्रि की पंचमी महातिथि पर कर्म, काल एवं ग्रहों की अधिष्ठात्री शक्ति देवी ललिता की सर्वश्रेष्ठ आराधना करें - तीर्थराज प्रयाग स्थित शक्तिपीठ में चढ़ावा चढ़ाएं।
ललिता देवी की आराधना का महत्व:
माँ ललिता दस महाविद्याओं में एक और श्रीविद्या तंत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भंडासुर नामक असुर ने त्रिलोक पर अधर्म फैलाया और ब्रह्मा, विष्णु, शिव भी उससे भयभीत हो गए। तब भगवान शिव के हृदय से एक दिव्य तेज निकला, और उसी से माँ ललिता देवी का प्राकट्य हुआ। माँ का प्राकट्य इसी आश्विन शुक्ल की पंचमी को हुआ जिसकी वजह से नवरात्रि की पंचमी को ललिता पंचमी भी कहा जाता है।
जहाँ अन्य देवियाँ शक्ति, संपत्ति या ज्ञान जैसे स्वरूपों की प्रतीक हैं, वहीं ललिता सभी शक्तियों का समग्र रूप हैं। वे मन, पदार्थ और आत्मा पर सर्वोच्च आधिपत्य दर्शाती हैं।
महा नवरात्रि पंचमी तिथि पर आराधना का महत्व:
माँ ललिता "पंचभूत-स्वरूपा" वे वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश पाँचों तत्वों की अधिष्ठात्री है। और उनका व्रत पंचमी (पाँचवाँ दिन) को है। पाँचों तत्वों की देवी का पाँचवाँ दिन यह कोई संयोग नहीं, यह शास्त्रों का सुनिश्चित विधान है।
ललिता देवी शक्तिपीठ में चढ़ावा क्यों करें?:
जब श्री हरि ने माता सती के शरीर को नष्ट किया, तब यहाँ माँ सती के हस्तांगुल गिरे थे। इसके बाद ही इस स्थान को शक्तिपीठ का दर्जा मिला।
नवरात्रि में जब देवी शक्ति का जागरण होता है, तब देवी साक्षात हर शक्तिपीठ में स्वयं वास करती हैं। ऐसे में नवरात्रि की पंचमी महातिथि पर में देवी के सिद्ध शक्तिपीठ में चढ़ावा करना सहस्त्रगुणा फलदायी माना जाता है।
ऐसे में चूकें न - आने वाली नवरात्रि पंचमी पर देवी कृपा हेतु शक्तिपीठ में चढ़ावा करें।: